हिंदी सिनेमा यानी बॉलीवुड में एक्टर बनने की हसरत लेकर हर साल हज़ारों लोग मुंबई पहुंचते हैं, लेकिन बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं जिनका ये सपना सच होता है. यहां पहला ब्रेक पाने के लिए एक्टर्स को काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है. ऐसे ही एक एक्टर की दास्तां आज हम आपको सुनाएंगे, जिन्हें पूरी दुनिया भारत कुमार उर्फ़ मनोज कुमार के नाम से जानती है.

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मनोज कुमार भी आम लोगों की तरह इंडस्ट्री में एक्टर बनने का सपना लेकर मायानगरी यानी मुंबई पहुंचे थे, मगर पहला ब्रेक पाने के लिए उन्हें भी कई पापड़ बेलने पड़े थे.आइए आज जानते हैं कि कैसे मनोज कुमार को पहला ब्रेक मिला था.

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मनोज कुमार की बुआ जी के बेटे लेखराज भाकरी पहले से ही इंडस्ट्री में काम कर रहे थे. वो अपनी फ़िल्म तांगेवाली के प्रीमियर के लिए दिल्ली आए थे. यहां उन्होंने मनोज कुमार को देख कर कहा ‘यार तू तो हीरो लगता है.’ इस पर मनोज कुमार ने भी कह दिया ‘तो फिर बना दो हीरो.’

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लेखराज जी ने कहा इसके लिए मुंबई आना होगा. उनका कहना मान मनोज कुमार मुंबई पहुंच गए. दिल में हीरो बनने की चाह थी, लेकिन एक-एक कर 6 महीने बीत गए. कहीं से कोई उम्मीद की किरण नहीं नज़र आ रही थी. लेखराज जी ने भी उन्हें किसी फ़िल्म में कास्ट करने के लिए अप्रोच नहीं किया था.

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तब एक दिन मनोज कुमार जी पहुंच गए उनके घर. यहां उन्होंने लेखराज जी से पूछा- ‘मैं फ़िल्मों में कब काम करूंगा.’ तब लेखराज जी ने उन्हें ऊपर से नीचे तक देखा और बोले- ‘अभी तो तुम्हारा एक जूता तक नहीं घिसा है, यहां तो लोगों की ज़िंदगियां घिस जाती है हीरो बनने में.’

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लेखराज की इस बात ने मनोज कुमार की बोलती बंद कर दी. उसके बाद उन्होंने कभी उनसे ये नहीं पूछा कब हीरो बनाओगे. इस घटना के बाद लेखराज भाकरी ने उन्हें एक रोल दिया. फ़िल्म का नाम था फ़ैशन. लेकिन मनोज कुमार का रोल फ़ैशनेबल बिलकुल नहीं था. ये एक छोटा सा रोल, जिसमें उन्हें एक 90 साल के भिखारी की एक्टिंग करनी थी. हालांकि, लेखराज उन्हें हैंडसम कहते थे और रोल क्या दिया एक भिखारी का.

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ख़ैर, इसके बाद वो उनकी कुछ फ़िल्मों में छोटे-मोटे रोल करते रहे. उन्हें पहला लीड रोल मिला फ़िल्म कांच की गुड़िया में. इसके बाद उन्हें विजय भट्ट ने मौक़ा दिया और उन्हें हीरो बना दिया फ़िल्म का नाम था हरियाली और रास्ता. इस फ़िल्म ने ही उन्हें एक एक्टर के रूप में इंडस्ट्री में स्थापित किया था. इसके बाद मनोज कुमार ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

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उन्होंने सिर्फ़ एक एक्टर ही नहीं, बल्कि कमाल के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के रूप में भी नाम कमाया. उन्होंने 'उपकार', 'रोटी, कपड़ा और मकान', 'पूरब-पश्चिम', और 'क्रांति' जैसी कई देश भक्ति फ़िल्मों में काम किया है. उनकी डायलॉग डिलीवरी और एक्टिंग का स्टाइल देख कर आज भी लोगों में देश भक्ति का जज़्बा पैदा हो जाता है.

ये पूरा क़िस्सा आप यहां सुन सकते हैं.


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