‘शराबी को शराबी नहीं तो क्या पुजारी कहोगे? गेंहू को गेंहू नहीं तो क्या ज्वारी कहोगे?’ 

‘मूंछे हो तो नत्थूलाल जैसी हो, वरना ना हो’. 
‘जिसने पी नहीं व्हिस्की, किस्मत फूट गई उसकी.’

इन डायलॉग को पढ़ने के बाद आप समझ ही गए होंगे कि हम किस फ़िल्म की बात करने जा रहे हैं. आज बात होगी अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फ़िल्म 'शराबी' की. वो मूवी जिसमें शराब को हाथ न लगाने वाले अमिताभ बच्चन ने एक शराबी का रोल निभाया था और क्या ख़ूब निभाया था.

sharaabi 1984
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साल 1984 में आई इस मूवी को बनाने का आइडिया डायरेक्टर प्रकाश मेहरा को वर्ल्ड टूर पर आया था. इस टूर पर बॉलीवुड सितारों के साथ अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा भी थे. जब वो फ़्लाइट में थे तब प्रकाश मेहरा ने अमिताभ से कहा था कि 'क्यों न एक ऐसे शख़्स पर फ़िल्म बनाई जाए जिसका बेटा शराबी हो.'

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अमिताभ राज़ी हो गए और इसके बाद मुंबई लौटने पर प्रकाश मेहरा ने स्टोरी पर काम शुरू कर दिया. इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन का एक हाथ जेब में रख कर थोड़ा झुक कर बात करने का स्टाइल आज भी लोगों का पसंदीदा स्टाइल है. अमिताभ के इस स्टाइल को आज भी लोग बातों-बातों में दोहराते दिखाई दे जाते हैं.

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ये असल में कोई स्टाइल नहीं था, बल्कि अमिताभ बच्चन की मजबूरी थी. दरअसल, हुआ यूं के इस फ़िल्म की शूटिंग जब चल रही थी तो दीवाली का सीज़न था. दीवाली में एक पटाखे से अमिताभ का हाथ जल गया था. हाथ इतना जल गया था कि वो उसके साथ शूटिंग करना ठीक नहीं होता.

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चूंकि शूटिंग का शेड्यूल बहुत टाइट था और अमिताभ उसे कैंसिल नहीं कर सकते थे. इसलिए प्रकाश मेहरा की सलाह पर उन्होंने हाथ में चोट लगने का सीन दिखाने की बात कही. ताकि बाकी के सीन्स में कुछ दिनों तक हाथ जेब में रख कर काम चलाया जा सके.

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इस तरह मजबूरन अमिताभ को अपना बायां हाथ जेब में रख कर शूटिंग करनी पड़ी थी. अमिताभ के इस आइडिया की वजह से ही शराबी के इस आइकॉनिक सीन का जन्म हो पाया था.

वैसे ये काम के प्रति अमिताभ बच्चन के डेडिकेशन को भी दर्शाता है. सच में अमिताभ जैसा कोई नहीं. 

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