कहते हैं लड़कों और लड़कियों की दोस्ती में काफ़ी फ़र्क होता है. पहली बात लड़के जल्दी किसी को अपना दोस्त मानते नहीं पर जब मानते हैं, तो जिगरी यार बन कर हर पल अपने दोस्त के साथ रहते हैं. ये आपस में कितनी ही गाली-गलौच और लड़ाई-झगड़ा क्यों न कर लें, पर मजाल है जो कोई इनकी दोस्ती के बीच आ जाये. लड़कों के इस दोस्ताने को बॉलीवुड की कुछ फ़िल्मों में बहुत ही बेहतरीन तरीके से दर्शाया गया है, जिन्हें देख कर हर कोई अपने दोस्त से बोलेगा 'तू मेरा भाई है'.

एक नज़र बॉलीवुड के इन शानदार और यादगार Bromances पर:

1. आकाश-समीर-सिड (दिल चाहता है)

ये फ़िल्म 2001 में रिलीज़ हुई थी, जिसमें आकाश-समीर-सिड नाम के तीन लड़कों की दोस्ती दिखाई गई है. फ़िल्म में इन तीनों को बाइक से गोवा ट्रिप पर जाते देख, कितने ही लड़कों ने गोवा जाने का प्लान बना लिया था.

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2. समीर-कुनाल (दोस्ताना)

दोस्ताना में अभिषेक बच्चन और जॉन की दोस्ती किसे पसंद नहीं आई होगी. इन दोनों ने Gay बनने का जो नाटक किया था, उसे देख कर पब्लिक की हंसी रोके नहीं रुक रही थी.

3. राजू-फ़रहान-रैंचो (3 इडियट्स)

कॉलेज में इन तीनों दोस्तों ने कई सुख-दुख एक साथ देखे और जब-जब दोस्ती निभाने की बारी आई, तीनों ही हमेशा साथ नज़र आये.

4. मुन्ना-सर्किट (मुन्नाभाई)

फ़िल्म में ये दोनों मिलकर समाज को सुधारने का ज़िम्मा उठाते हैं और कामयाब भी होते हैं.

5. जय-वीरू (शोले)

ये फ़िल्म देखने के बाद लोग कहने लगे थे कि दोस्ती हो, तो जय-वीरू जैसी वरना न हो. इसके साथ ही फ़िल्म का गाना 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' आज भी गुनगुनाया जाता है.

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6. डीजे-सुखी-करण-असलम-लक्ष्मण (रंग दे बसंती)

कहते हैं इतिहास ख़ुद को दोहराता है और इन चारों की जोड़ी कॉलेज जाकर उसी इतिहास को दोहराती है.

7. सिड-लक्ष्मी-ऋषि (वेक अप सिड!)

दोस्तों की ये तिकड़ी भागती-दौड़ती दुनिया में अपनी ताक़त को पहचान कमज़ोरियों से लड़, प्यार की तलाश करने की निकलती है.

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8. जय-अदिति (जाने तू या जाने ना)

फ़िल्म में जय-अदिति की जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. फ़िल्म देखने के बाद हर लड़की बस यही सोचती थी कि अगर बेस्ट फ़्रेंड हो, तो जय जैसा वरना न हो.

9. बनी-अदिति-अवि (ये जवानी है दीवानी)

इन तीनों ही दोस्तों की राहें भले ही अलग-अलग थीं, लेकिन दोस्ती को लेकर ज़ुनून एक ही था. सात समुंदर पार हो कर भी जब बनी अदिति की शादी के लिये इंडिया आता है, तो वो सीन हर दोस्त की आंखें नम कर देता है.

10. बिशन-किशन (याराना)

याराना फ़िल्म में अमिताभ बच्चन और अमजद ख़ान की जोड़ी दिलचस्प जोड़ियों में से एक थी. फ़िल्म में किशन-बिशन वो दोस्त थे, जो एक-दूसरे के लिये कुछ भी बलिदान कर देते हैं.

11. ईशान-ओमकार-गोविंद (काई पो चे!)

सुशांत सिंह राजपूत, राजकुमार राव और अमित साध, इन तीनों ने फ़िल्म में पुरुष मित्रता को बख़ूबी दर्शाया है.

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12. अर्जुन-इमरान-कबीर (ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा)

जैसा कि फ़िल्म के टाइटल से साफ़ है कि ज़िंदगी न मिलेगी दोबारा और ये तीनों भी इसी चीज़ में विश्वास रखते हुए एक ट्रिप का प्लान बनाते हैं, जिसमें ये तीनों दोस्त वो सब कुछ करना चाहते हैं, जो काम के प्रेशर की वजह से अब तक नहीं कर पाये थे.

13. श्याम-राजू-बाबू राव (हेरा फेरी)

बाबू राव, श्याम और राजू का मकानमालिक होता है, जो हर वक़्त दोनों को किराये को लेकर टोकता रहता है. अच्छी बात ये है कि बाबू राव इन दोनों को कुछ भी बोल लें, पर मुसीबत के समय दोनों के साथ नज़र आता है.

14. संजू-मकसूद-घनश्याम (जो जीता वही सिकंदर)

फ़िल्म की कहानी कॉलेज स्टूडेंट पर आधारित होती है. आमिर खान, देवेन भोजानी और आदित्य लखिया ने तीन ऐसे दोस्तों के किरदारों को निभाया है, तो बेवकूफ़ और सीधे होते हैं.

15. अमर-प्रेम (अंदाज़ अपना अपना)

फ़िल्म में दोनों ही दोस्तों का दिल एक लड़की पर आ जाता है, पर इससे इनके दोस्ती पर कोई फ़र्क नहीं आता.

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16.कबीर-प्लूटो (दिल धड़कने दो)

दिल धड़कने दो में कबीर-प्लूटो काफ़ी अच्छे दोस्त होते हैं, जो एक-दूसरे की ख़ुशी के लिये कुछ भी कर सकते हैं.

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17. भुवन-इस्माइल (लगान)

फ़िल्म में इन दोनों की जोड़ी की बदौलत ही टीम टारगेट हासिल करने में कामयाब रहती है.

18. एमसी शेर-मुराद (गली बॉय)

एमसी शेर के मोटिवेशन और साहस की वजह से ही मुराद अपने लक्ष्य तक पहुंच पाता है.

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