‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई’ शोले फ़िल्म का ये डायलॉग आज भी लोग बातों-बातों में इस्तेमाल करते नज़र आ जाते हैं. इस फ़िल्म में ये डायलॉग सबके चहेते रहीम चाचा यानी ए.के. हंगल ने बोला था. वही ए.के. हंगल जिन्होंने सैंकड़ों बॉलीवुड फ़िल्मों में अनेकों कैरेक्टर रोल निभाए थे.

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कभी स्वतंत्रता सेनानी रहे ए.के. हंगल साहब ने 50 की उम्र में इंडस्ट्री में कदम रखा था. हालांकि, वो पहले से ही थिएटर करते थे, लेकिन फ़िल्मों में काम उन्होंंने बाद में शुरू किया. उनकी पहली फ़िल्म थी 'तीसरी कसम'. इसके बाद उन्होंने 'अभिमान', 'आनंद', 'शोले', 'बावर्ची', 'कोरा काग़ज', 'शौकीन', 'आंधी', 'दीवार', 'चितचोर', 'सत्यम शिवम सुंदरम', 'परिचय', 'गरम हवा', 'अवतार', 'गुड्‌डी', 'शराबी', 'मेरी जंग', 'लगान' जैसी क़रीब 225 फ़िल्मों में काम किया.

आज उन्हीं ए.के. हंगल साहब से जुड़े कुछ दिलचस्प क़िस्से हम आपके लिए लेकर आए हैं.

1. एक पुलिस वाले ने उनकी एक्टिंग को रियल समझ लिया था.

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फ़िल्म नमक हराम में हंगल साहब ने ट्रेड यूनियन लीडर का रोल ऐसा निभाया कि एक पुलिस वाले को लगा कि वो सच में एक यूनियन लीडर हैं. इसके कारण उसने हंगल साहब के घर जाकर उन्हें एक यूनियन शुरू करने के बारे में कई सवाल किए. इस पर उन्होंने कहा कि वो बस एक्टर हैं उनका यूनियनों से कोई लेना देना नहीं है.

2. बाल ठाकरे ने कर दिया था बैन

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1993 में उन्हें बाल ठाकरे ने बैन करवा दिया था. दरअसल, वो मुंबई के पाकिस्तानी काउंसिलर के ऑफ़िस में वीज़ा लेने गए थे. यहां पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस सेलिब्रेट किया गया था, जिसमें वो भी शामिल हुए. इससे ख़फा होकर बाल ठाकरे जी ने उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री में बैन करवा दिया था. ये अघोषित बैन क़रीब दो साल तक चला था. इससे उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था.

3. पाकिस्तान एयरपोर्ट पर फ़ैंस ने लिया था घेर

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एक बार हंगल साहब रूस से भारत लौट रहे थे. तब किसी टेक्निकल समस्या के कारण उनका प्लेन पाकिस्तान के करांची एयरपोर्ट पर लैंड करना पड़ा. वे एयरपोर्ट पर बैठे थे. उनके फ़ैंस ने उन्हें पहचान लिया और घेरा लगाकर उनसे और बॉलीवुड स्टार्स से जुड़े कई सवाल पूछे.

4. संजीव कुमार को दिया था अपने नाटक में रोल

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जैसा कि सभी को पता है हंगल साहब फ़िल्मों में आने से पहले थिएटर करते थे. वो भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा) नाम के थिएटर समूह से भी जुड़े थे. उन्होंने यहां अमीर और ग़रीब के बीच बढ़ती खाई और ग़रीबों से जुड़ी कई समस्याओं पर नाटक किए थे. ऐसे ही एक नाटक में उन्होंने संजीव कुमार को भी एक रोल दिया था.

5. एक लड़की ने समझ लिया था बुरा आदमी

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हंगल साहब ने फ़िल्म शौकीन में एक ग्रे शेड किया था. इसके चलते उन्हें लोग बुरे कैरेक्टर का समझने लगे थे. फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद दिल्ली में वो एक बड़े होटल में डिनर कर रहे थे. इसके बाद उन्हें कार से दोस्त के घर जाना था. ये काम एक लड़की को दिया गया. उस लड़की ने अपने बॉस को ये कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने शौकीन फ़िल्म देखी है. मतलब वो उन्हें सच में बुरा आदमी समझ बैठी थी. इसके बाद होटल के मैनेजर ने किसी और को उन्हें छोड़ आने का काम दिया था.

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