1966 में राजेंद्र और वैजयंती माला की फ़िल्म आई थी ‘सूरज’. इसके गाने सुपरहिट हुए थे और आज भी लोग इन्हें गुनगुनाते दिखाई दे जाते हैं. इस फ़िल्म का एक सुपरहिट गाना था 'बहारों फूल बरसाओ’ ये गाना आज भी शादी और पार्टी में बजता सुनाई दे जाता है. इस गाने को गाया था मशहूर सिंगर मोहम्मद रफ़ी साहब ने और संगीत दिया था शंकर-जयकिशन ने. 

इस गीत को फ़िल्म फ़ेयर के तीन-तीन अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट सिंगर, बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर और बेस्ट गीतकार. इसके राइटर से जुड़ा एक स्पेशल क़िस्सा आज हम आपको बताएंगे.

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'बहारों फूल बरसाओ’ को लिखा था फ़ेमस बॉलीवुड गीतकार हसरत जयपुरी ने. उन्होंने 50-80 के दशक में कई सुपरहिट गानों को लिख कर हमेशा के लिए अमर कर दिया था. उनके बारे में कहा जाता है कि वो टाइटल सॉन्ग लिखने में माहिर थे. उन्होंने ‘दिल एक मंदिर’, ‘ऐन इवनिंग इन पेरिस’, ‘दीवाना’, ‘तेरे घर के सामने’, ‘रात और दिन’ जैसी फ़िल्मों के टाइटल सॉन्ग लिखे थे. ख़ैर बात करते हैं उनके गीतकार बनने के सफ़र की.

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हसरत जयपुरी साहब अपने घर जयपुर से मुंबई काम की तलाश में आए थे. उन्हें शायरी लिखने का शौक़ था. मुंबई आने के बाद उन्हें बस में कंडक्टर की जॉब मिली. उस वक़्त उन्हें 11 रुपये महीने तनख़्वाह मिलती थी. ड्यूटी करने के साथ ही वो शाम को होने वाले कई मुशायरे में जाया करते थे. यहां उनके लिखे गीत और शायरियां लोगों को पसंद आती थी.

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ऐसे ही एक मुशायरे में पृथ्वी राज कपूर ने उन्हें परफ़ॉर्म करते हुए देखा था. उन्होंने अपने बेटे राज कपूर से उनकी सिफ़ारिश की जो उस वक़्त फ़िल्म 'बरसात' बना रहे थे. इसके लिए उन्हें एक गीत लिखवाना था. इस तरह हसरत जयपुरी साहब को फ़िल्म 'बरसात' के गाने 'जिया बेकरार' को लिखने का मौक़ा मिला. 

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गाना सुपरहिट हुआ और हसरत जयपुरी साहब का भी करियर निकल पड़ा. इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट गीत लिखे. इनमें ‘बदन पे सितारे’, ‘आजा सनम’, ‘दुनिया बनाने वाले’ जैस गीत शामिल हैं. किसी ने शायद ही सपने में सोचा होगा कि एक बस में कंडक्टरी करने वाला शख़्स एक दिन बॉलीवुड का बहुत बड़ा गीतकार बनेगा. हसरत जयपुरी साहब से जुड़ा ये क़िस्सा आप यहां पढ़ सकते हैं. 

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