"बाबूमोशाय, ज़िंदगी और मौत ऊपरवाले के हाथ है…उसे न आप बदल सकते हैं न मैं!" राजेश खन्ना के फ़ैंस को ये डायलॉग ज़रूर याद होगा. साथ ही याद होगी वो फ़िल्म जिसमें इसे इस्तेमाल किया गया था. इस फ़िल्म का नाम था आनंद, जिसमें राजेश खन्ना ने एक ख़ुश मिज़ाज कैंसर पेशेंट का रोल निभाकर उन्होंने दर्शकों को इमोशनल कर दिया था.

मगर ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित इस ब्लॉक बस्टर फ़िल्म के लिए राजेश खन्ना उनकी पहली पसंद नहीं थे. बल्कि उनसे पहले एक एक्टर और सिंगर के साथ उन्होंने इस फ़िल्म को बनाने के बारे में सोचा था. वो कौन थे और कैसे ये फ़िल्म उनके हाथ से निकल गई, चलिए आज आपको बताते हैं.

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ऋषिकेश मुखर्जी ने जब इस फ़िल्म का ड्राफ़्ट लिखा था तब वो इसे बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर के साथ बनाना चाहते थे. मगर वो उस समय बहुत बड़े स्टार थे और हमेशा कहीं न कहीं बिज़ी रहते थे. साथ ही उनका लीड कैरेक्टर आनंद एक नौजवान कैंसर पेशेंट था. इसलिए उन्होंने राज कपूर को कास्ट करने का आइडिया छोड़ दिया.

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अब ये फ़िल्म लेकर वो पहुंचे उस ज़माने के मशहूर सिंगर किशोर कुमार के पास. मगर किशोर कुमार के गार्ड की वजह से ये फ़िल्म उनके हाथ से निकल गई. जिस दिन ऋषिकेश मुखर्जी उनके पास इस फ़िल्म का ऑफ़र लेकर गए थे, वो किशोर कुमार का बहुत बुरा दिन था.

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हुआ यूं कि उस दिन किशोर कुमार किसी से अपने काम की पेमेंट लेने गए थे. वो इत्तेफ़ाक से एक बंगाली आदमी था और उनके पैसे देने में ना-नुकुर कर रहा था. इस बात पर किशोर कुमार और उसके बीच तू-तू, मैं-मैं हो गई. उसके वहां से जब वो अपने घर आए तो गुस्से में गार्ड से बोले कि अगर कोई बंगाली उनसे मिलने आए तो उसे गेट से ही चलता करना.

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उसी शाम को ऋषिकेश मुखर्जी उनसे मिलने जा पहुंचे. जब गार्ड को पता चला कि वो बंगाली हैं, तो उसने आव देखा न ताव उन्हें झिड़कते हुए चले जाने को कह दिया. इस बात से ऋषिकेश मुखर्जी को बहुत धक्का लगा और वो किशोर को कास्ट करने का आइडिया भी ड्राप कर दिया.

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इसके बाद एक दिन 'हाथी मेरे साथी' की शूटिंग करते समय राजेश खन्ना को इस फ़िल्म के बारे में पता चला. वो ख़ुद ऋषिकेश मुखर्जी से मिलने गए और उनसे कहा कि वो इस फ़िल्म को करना चाहते हैं. इसके लिए उनकी जो भी शर्तें होंगी उन्हें सभी मंजूर हैं. इस तरह ये फ़िल्म पहले राज कपूर और बाद में किशोर कुमार के हाथ से निकल कर राजेश खन्ना की झोली में चली गई.

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