1960 में रिलीज़ हुई थी राज कपूर की सुपरहिट फ़िल्म 'जिस देश में गंगा बहती है'. इस फ़िल्म के लिए राज कपूर को बेस्ट एक्टर का फ़िल्मफ़ेयर(Filmfare) अवॉर्ड मिला था और को-स्टार पद्मिनी को बेस्ट एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेशन. ये राज कपूर की आख़िरी ब्लैक एंड व्हाइट फ़िल्म थी. इसी फ़िल्म इंडियन सिनेमा का ऐतिहासिक गीत भी फ़िल्माया गया था. 

हम बात कर रहे हैं इस फ़िल्म के गाने ‘आ अब लौट चलें’ की. इसे गाया था मुकेश और लता मंगेशकर ने. फ़िल्म का संगीत दिया था उस दौर की मशहूर जोड़ी में से एक शंकर-जयकिशन ने. गाने के बोल लिखे थे शैलेंद्र ने जो राज कपूर साहब के बहुत अच्छे दोस्त भी थे.

सबसे बड़ा ऑर्केस्ट्रा   

jis desh mein ganga behti hai ab laut chalen song
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ये गाना ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि इसमें भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा ऑर्केस्ट्रा इस्तेमाल किया गया था. राधू कर्माकर द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म के गाने को रिकॉर्ड करने लिए 60 कोरस कलाकार, 60 वायलिन, 4 डबल बास, 12 सेलोस वाद्य, 2 मैंडोलिन, 12 रिदम-सेक्शन, 2 सितार, 10 ब्रास ट्रंपेट, 6 साइड रिदम और 2 मुख्य गायक की भारी भरकम टीम लगी थी. भारतीय सिनेमा के इतिहास में किसी भी संगीत निर्देशक द्वारा एक गाने के लिए इस्तेमाल किया गया ये सबसे बड़ा ऑर्केस्ट्रा था. 

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3 बजे रात में हुई थी फ़ाइनल रिकॉर्डिंग

jis desh mein ganga behti hai ab laut chalen song
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इस गाने की रिहर्सल सुबह 11 बजे स्टार्ट हुई थी मुंबई के फ़ेमस तारदेव रिकॉर्डिंग स्टूडियो में. स्टूडियो में कम जगह होने के चलते टीम के बहुत से मेंबर्स को हॉल के बाहर बैठाया गया था. इस ऐतिहासिक गीत की फ़ाइनल रिकॉर्डिंग सुबह 3 बजे हुई थी, क्योंकि उस वक़्त मुंबई की सड़कों पर कोई ट्रैफ़िक नहीं था, मतलब वो शांत थीं. इस गाने को रिकॉर्ड करने का श्रेय जाता है फ़ेमस बॉलीवुड रिकॉर्डिस्ट मीनू कात्रक जी को जिन्हें प्यार से लोग मीनू बाबा कहकर बुलाते थे. उन्होंने इसके लिए 6 माइक इस्तेमाल किए थे.

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एक टेक में रिकॉर्ड हुआ था गाना

jis desh mein ganga behti hai
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ख़ास बात ये है इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान फ़ेमस फ़िल्ममेकर संजय लीला भंसाली के पिता डी.ओ. भंसाली(मशहूर साउंड रिकॉर्डिस्ट) उनके असिस्टेंट बॉय थे. उस दौर में म्यूज़िक इंडस्ट्री में लेटेस्ट तकनीक नहीं आई थी इसलिए इस गाने को एक साथ रिकॉर्ड किया गया था. मतलब संगीतकारों और सिंगर्स के साथ गाने को एक ही टेक में रिकॉर्ड किया गया था. इस रिकॉर्डिंग के म्यूज़िक अरेंजर्स थे द ग्रेट सेबेस्टियन और संगीतकार दत्ताराम. 

चलते-चलते आइए इस ऐतिहासिक गीत को एक बार फिर से देख लेते हैं: