माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) 90 के दशक में बॉलीवुड के नंबर 1 एक्ट्रेस हुआ करती थीं. हिंदी सिनेमा के 100 साल पूरे होने पर ब्रिटेन में हुए पोल में अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार और शाहरुख ख़ान के बाद माधुरी दीक्षित भारत की सबसे स्टार थीं. आज के दौर की कई बड़ी एक्ट्रेस उन्हें अपना आदर्श मानती हैं. माधुरी के दुनियाभर में करोड़ों फ़ैंस हैं. मशहूर पेंटर एम.एफ़ हुसैन तो उनके इनके इतने बड़े फैन थे कि उन्होंने माधुरी की फ़िल्म हम आपके हैं कौन 67 बार देखी थी. इसके बाद उन्होंने माधुरी के लिए गजगमिनी फ़िल्म बनाई थी. लेकिन भारत में माधुरी दीक्षित का एक और जबरा फ़ैन है, जिनका नाम ‘पप्पू सरदार’ है.

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झारखंड के जमशेदपुर में रहने वाले पप्पू सरदार माधुरी के इतने बड़े वाले फ़ैन हैं कि वो उनके लिए कुछ भी कर गुजरते हैं. जमशेदपुर की साकची मार्केट में बसंत सिनेमा के पास ‘मनोहर चाट’ के नाम से एक मशहूर दुकान है. इस दुकान की चाट जितनी फ़ेमस है, उससे ज़्यादा फ़ेमस इसके मालिक पप्पू सरदार हैं. वो माधुरी दीक्षित के फ़ैन के रूप में इतने मशहूर हैं कि अगर आप जमशेदपुर में किसी भी ऑटोवाले से ‘माधुरी दीक्षित का जबरा फ़ैन’ के पास छोड़ने को कहोगे तो वो बिना कोई सवाल जवाब किए तेज़ी से ‘मनोहर चाट’ के पास अपना ऑटो टिका देता है.

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दरअसल, माधुरी दीक्षित ने एक बार ‘पप्पू सरदार’ को राखी बांध दी थी. पप्पू तबसे ही उन्हें अपनी बहन मानते हैं और उनके पति डॉ. श्रीराम नेने को जीजाजी ही बोलते हैं. वो पिछले 27 सालों से वो उनका बर्थडे धूमधाम से बनाते आ रहे हैं. केवल इतना ही नहीं साल 1999 में जब माधुरी दीक्षित अमेरिका में श्रीराम नेने के साथ शादी के फेरे ले रही थीं, तब जमशेदपुर में पप्पू सरदार ने बारात निकालकर 200 लोगों को रिसेप्शन की पार्टी भी दी थी. पप्पू सरदार को माधुरी का जबरा फ़ैन यूं ही नहीं कहा जाता है.

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पप्पू सरदार कैसे बने माधुरी के फ़ैन

मीडिया से बातचीत में पप्पू सरदार का कहना था कि सन 1988 में जब माधुरी दीक्षित की फ़िल्म ‘तेजाब’ रिलीज़ हुई तब मैंने पहली बार उनकी कोई फ़िल्म देखी. मुझे फ़िल्म में उनकी एक्टिंग और डांस बेहद पसंद आया. तभी से मैं उनका फ़ैन बन गया. मैंने उनकी सभी फ़िल्में देखी हैं. मेरी दुकान में आज भी उनकी कई पुरानी तस्वीरें मौजूद हैं. आज भी मैं अपने घर में भगवान के साथ माधुरी दीक्षित की भी पूजा करता हूं. मैंने अपने घर का एक पूरा कमरा उनको डेडिकेट किया है.

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1996 में मनाया था पहली बार माधुरी का जन्मदिन

”मैंने माधुरी दीक्षित जी का जन्मदिन पहली बार साल 1996 में मनाया था. तब मैंने अपनी दुकान पर सभी लोगों के लिए चाट फ़्री कर दी थी. इस दौरान मुफ़्त चाट मिलने पर इतनी ज़्यादा भीड़ जमा हो गई थी कि प्रशासन के लिए लोगों को संभालना मुश्किल हो गया था. इस दौरान मुझे काफ़ी डांट भी पड़ी थी, लेकिन मुझे डांट से कोई फ़र्क नहीं पड़ा. मुझे कोई पागल, तो कोई बेवकूफ़ कहता था. लेकिन माधुरी के लिए मेरा पागलपन जारी रहा”.

मैंने साल 1997 में भी माधुरी जी के जन्दमदिन के मौके पर फिर से ऐसा ही किया. तब भी मुझे प्रशासन से काफ़ी डांट पड़ी थी, लेकिन साल 1998 में मीडिया को मेरे बारे में ख़बर लगी तो इसके बाद से लोग मेरा सपोर्ट करने लगे. प्रशासन के लोगों ने भी मेरा सहयोग करना शुरू कर दिया. तब से लेकर आज तक हर साल मैं उनका जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मना रहा हूं.

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माधुरी के नाम स्पेशल कैलेंडर

माधुरी दीक्षित के जबरा फ़ैन पप्पू सरदार ने साल 2004-2005 में एक ख़ास कैलेंडर छपवाया था. इसमें उन्होंने 15 मई से साल की शुरुआत की थी, जो माधुरी का जन्मदिन होता है. लालू प्रसाद यादव जब देश के रेल मंत्री हुआ करते थे तब पप्पू ने लालू यादव के नाम एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें माधुरी दीक्षित के नाम पर ट्रेन का नाम रखने की अपील की थी. इसके अलावा साल 2004 में पप्पू सरदार ने एक और लेटर लिखा था, जिसमें माधुरी के जन्मदिन पर ‘नेशनल हॉलिडे’ घोषित करने की मांग की थी.

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कैसी थी पहली मुलाक़ात

साल 2007 में मीडिया की मदद से पप्पू सरदार ने पहली बार माधुरी दीक्षित से मुलाक़ात की थी. वो पहली बार फ़्लाइट के ज़रिए जमशेदपुर से मुंबई गए थे. इस दौरान उन्होंने फ़ैसला किया था कि माधुरी दीक्षित से मिलने से पहले वो न कुछ खाएंगे न ही पिएंगे. आख़िरकार 30 नवंबर 2007 को पप्पू ने माधुरी से पहली और आख़िरी मुलाक़ात की थी. तब माधुरी यशराज स्टूडियो में शूटिंग कर रही थीं. इस दौरान मीडिया कर्मी उन्हें माधुरी से मिलवाने स्टूडियो स्टूडियो ले गए थे. इस दौरान माधुरी उनसे इस कदर प्रभावित हुई कि उन्होंने पप्पू सरदार को राखी बांध दी.

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देवदास की रिलीज़ पर किया था रोड शो

पप्पू सरदार ने साल 2002 में माधुरी दीक्षित की फ़िल्म देवदास की रिलीज़ के मौक़े पर जमशेदपुर में रोड शो किया था. साल 2019 में जब माधुरी दीक्षित की फ़िल्म टोटल धमाल रिलीज़ हुई थी तब वो 600 महिलाओं को फ़िल्म देखाने ले गए थे.

माधुरी के नाम पर करते हैं दान

देश में जब भी कोई आपदा आती है वो माधुरी दीक्षित के नाम से दान करते हैं. केरल, उड़ीसा, असम और बिहार में आई बाढ़ से हुआ नुक्सान हो या फिर किसी तूफ़ान से हुई तबाही, पप्पू सरदार हमेशा माधुरी दीक्षित के नाम पर 11 हज़ार रुपये दान करते हैं. माधुरी दीक्षित की मां की मौत के समय भी उन्होंने माधुरी के नाम से महाराष्ट्र के एक गुरुद्वारे में पैसे भिजवाए थे. माधुरी के नाम पर ग़रीब लड़कियों की शादी भी करवाते हैं. अमृतसर के पिंगलावाड़ा ट्रस्ट को भी माधुरी दीक्षित के नाम पर पैसे भेजते हैं. इसके अलावा उन्होंने कोरोनाकाल में भी काफ़ी डोनेशन दिया था.

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पप्पू सरदार पर रिसर्च करने अमेरिका से आई थी टीम

साल 2010 में अमेरिका में ‘इमोशनल फ़ैन’ नाम की एक बुक छपी थी, जिसके लिए अमेरिका से कुछ लोग रिसर्च करने भारत आए थे. इस दौरान अमेरिकी रिसर्च टीम पप्पू सरदार से मिलने जमशेदपुर गई थी. पप्पू रिसर्च टीम के साथ किसी ‘ओल्ड एज होम’ भी गए. इस दौरान उन्हें कई बुज़ुर्ग महिलाओं ने राखी बांधी थी. वो आज तक हर साल राखी का त्योहार उसे ‘ओल्ड एज होम’ में मनाते हैं. देशभर की कई दिव्यांग लड़कियों उन्हें राखी बांधती हैं. पप्पू हर साल देशभर की क़रीब 400 दिव्यांग लड़कियों से राखी बंधवाते हैं और उनकी मदद करते हैं.

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पप्पू सरदार का ख़ुद का परिवार भी है. उनकी पति और एक बेटा है. लेकिन पप्पू ने अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी अपने परिवार को नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों वाली एक संस्था को बनाया है. अगर उन्हें कुछ हो जाता है तो सारा पैसा संस्था को मिलेगा.

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