A R Rahman: संगीत का वो डॉक्टर है जो एक टूटे हुए दिल को रफ़ू करने का काम करता है. इसमें इतनी ताक़त है कि ग़म को दूर करके ख़ुशियों से दिल को भर दे. सरहद पार भी संगीत जाने का रास्ता बना लेता है. बॉलीवुड में तो ऐसे कितने गाने हैं जो ज़िंदगी के पलों में साथी का काम करते हैं. कहीं उसमें ए आर रहमान (AR Rahmanकी आवाज़ और उनका बनाया म्यूज़िक घुल जाए तो उस गाने को कानों से सीधा दिल में उतरने से कोई नहीं रोक सकता उस गाने को सुनते ही दिल के ज़ख़्म चुटकियों में भर जाते हैं.

वैसे तो ए आर रहमान मीडिया से ज़्यादा बात नहीं करते हैं मगर सेलेब हैं तो क़िस्से तो कहीं न कहीं से सुनने को मिल ही जाते हैं, तो आज उनसे जुड़ा एक क़िस्सा आपको भी बताते हैं.

हम सभी जानते हैं कि 1992 में आई मणिरत्नम की फ़िल्म ‘रोजा’ ने हमें ए आर रहमान (A R Rahman) जैसे रूहानी सिंगर से मिलाया. संगीत के उस जादू से मिलाया जो सीधे दिलों को जीतता है. रहमान ने अपने संगीत से फ़िल्म ‘रोजा’ को यादगार बना दिया. ‘ये हसीं वादियां ये खुला आसमां’ गाना तो याद होगा जिसे आज भी लोग लूप में सुनते हैं उसे ए आर रहमान ने ही बनाया था.

‘रोजा’ की सफलता के बाद मणिरत्नम दोबारा रहमान के साथ काम करना चाहता थे, जिसके चलते उन्होंने रहमान को फ़िल्म ‘बॉम्बे’ के लिए फिर से एक गाना तैयार करने को कहा. मगर काफ़ी समय बीत गया और गाना तैयार नहीं हुआ जिससे मणिरत्नम ग़ुस्सा हो गए और ग़ुस्से में ही वो ए आर रहमान को फ़िल्म से निकालना चाहते थे. मगर जब मणिरत्नम ने रहमान की बानई धुनसुनी तो वो अपना सारा ग़ुस्सा भूल गए और धुन को सुनकर रोने लगे. इस क़िस्से का ज़िक्र ‘बॉम्बे’ फ़िल्म के सिनेमैटोग्राफ़र रहे राजीव मेनन ने O2 से हुई बातचीत में किया था.

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रहमान को जो गाना तैयार करना था वो था ‘हम्मा हम्मा’. हालांकि, गाने की शूटिंग होनी थी और रहमान गाना के साथ तैयार नहीं थे, इसलिए मणिरत्नम को ग़ुस्सा आया. रहमान ने इन सबके बाद मणिरत्नम से कुछ समय मांगा और उनसे शाम को आने के लिए कहा.

राजीव आगे बताते हैं,

हम लोग जब शाम को रहमान के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि उनके पास धुन नहीं है तो मणिरत्नम ने कहा कि जब धुन नहीं थी तो बुलाया क्यों था? रहमान ने कहा मेरे पास उस गाने के लिए धुन नहीं है जो आपने दिया था मगर मेरे पास कुछ और है. इतना कहकर उन्होंने ‘बॉम्बे’ फ़िल्म की थीम बजाई. 

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राजीव ने आगे बताया,

धुन सुनने के बाद राजीव और मणि रत्नम की आंखों में आंसू थे. भावुक मणिरत्नम ने ए आर रहमान से कहा कि, ये तुमने क्या कर डाला. मैं तो तुम्हें निकालना चाहता था और तुमने मुझे रुला दिया. इतना बेहतरीन संगीत बनाने के वाबजूद रहमान ने बहुत सहजता से जवाब दिया कि अभी तो मेरे पास यही धुन है. फिर इस धुन को फ़ाइनल किया गया और अगले 3 दिन तक इसी पर काम हुआ.

रहमान और मणि रत्नम 25 साल से साथ काम कर रहे हैं. दोनों ने मिलकर संगीत और सिनेमा को वो आयाम दिया है जिसे कोई छू नहीं सकता. इन्होंने साथ में ‘इरुवर’, ‘गुरु’, ‘अलैपयुदे’, ‘दिल से’ और ‘रावणन’ जैसी फ़िल्में बनाई है. इसके अलावा, मणि रत्नम की PS-1 और PS-2 में भी ए आर रहमान का संगीत है.

आपको बता दें, ए आर रहमान को ‘मोज़ार्ट ऑफ़ मद्रास‘ कहा जाता है. इनका असली नाम ए एस दिलीप कुमार है, जिसे बाद में बदलकर अल्लाह रख़ा रहमान कर दिया गया. ए आर रहमान को ऑस्कर और फ़िर ग्रैमी अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. आप अद्वितीय, अद्भुत, प्रेरणा और बेमिसाल है.