एक हीरो को हीरो बनाता है विलन. बिना विलन हीरो की कोई अहमियत नहीं. फिर वो चाहें असल ज़िंदगी हो या फिर फ़िल्मों में. और बात जब बॉलीवुड फ़िल्मों की हो, तो यहां के खूंखार विलन तो हमारी बुरी कल्पनाओं के भी पार होते हैं. वजह है कि विलन जितना ज़बरदस्त होगा, उतना ही उसके मात खाने पर हीरो को दर्शकों की तालियां मिलेंगी. तो बस बॉलीवुडिया फ़िल्में भी एक से बढ़कर एक रौबीले पर्सनैलिटी वाले लोगों को कास्ट करती रही हैं.

Manik Irani
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एक ऐसे ही शख़्स ने 80 के दशक में बॉलीवुड में एंट्री मारी थी. नाम था माणिक ईरानी. आप शायद ही इस विलन को उसके असली नाम से जानते हों. मगर माणिक जिस नाम से लोगों के बीच मशहूर हुए, वो नाम आज भी लोगों की ज़ुबान पर है. नाम है बिल्ला.

6 फुटा लंबा चौड़ा ये शख़्स जब पर्दे पर आता था, तो हीरो पर भी भारी पड़ता दिखाई देता है. उसका शरीर ऐसा फौलादी दिखता था, मानो अपने बाजुओं से ही ये किसी पत्थर को भी चकनाचूर कर देगा. 

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80 और 90 के दशक के सबसे बड़े फ़िल्मी बदमाश थे माणिक ईरानी

माणिक ईरानी ने साल 1974 से फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी. 'पाप और पुण्‍य' में उन्होंने एक बदमाश का क़िरदार निभाया था. इस फ़िल्म में उनकी पर्सनैलिटी को काफ़ी सराहा गया. उसके बाद 1976 में आई 'कालीचरण' में उन्‍होंने गूंगे बदमाश का रोल निभाया. 

'त्रिशूल' फ़िल्म में तो उन्होंने अमिताभ बच्चन की भी जमकर धुनाई की. स्टार्डम में भले ही वो अमिताभ के बराबर न हों, मगर पर्दे पर उनकी पर्सनैलिटी एंग्री यंग मैन को कांटे की टक्कद देती थी. लोग भी ऐसे विलन को अमिताभ जैसे हीरो के  अपोज़िट देखना पसंद कर रहे थे. फिर तो ऐसा दौर चला कि अमिताभ की ज़्यादातर फ़िल्मों में वो गुंडे के क़िरदार में नज़र आने ही लगे. मिस्‍टर नटवरलाल', 'शान', 'नास्‍त‍िक', इन सभी फ़िल्मों में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया. कहते हैं कि उन्होंने 1978 में फिल्‍म ‘डॉन’ में अमिताभ बच्‍चन के बॉडी डबल का रोल भी किया था. हालांकि, इसके लिए उन्हें क्रेडिट नहीं मिला था.

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'हीरो' में काम कर मिली इस विलन को यादगार पहचान (बिल्ला)

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फ़िल्म थी 'हीरो'. इसे सुभाष घई ने डायरेक्ट किया था. यूं तो इस फ़िल्म से जैकी श्रॉफ बतौर हीरो लॉन्च हुए, मगर इसी फ़िल्म ने माणिक ईरानी को बिल्ला नाम से एक खूंखार बदमाश के तौर पर फ़ेमस कर दिया. इस फ़िल्म में उनका लुक तो ज़बरदस्त था ही, साथ में डॉयलाग डिलिवरी भी कमाल थी. जब वो अपने बालों को बीच से काढ़कर खूंखार मुस्कुराहट के साथ बोलते, तो देखने वालों के भी रोंगटे खड़े हो जाते.

अचानक कहां ग़ायब हो गया बिल्ला?

ये सवाल उठना लाज़मी है कि जिस एक्टर ने इतनी सारी फ़िल्मों में काम किया. हर बड़े स्टार के साथ उसके एक्शन सीन थे. अपने करियर की पीक पर था, वो अचानक कैसे ग़ायब हो गया. दरअसल, ज़िंदगी में अचानक कुछ नहीं होता. माणिक ईरानी के साथ भी ऐसा ही था. 

माणिक काफ़ी वक़्त से शराब के लती थे. जैसे-जैसे उनका करियर आगे बढ़ता गया, उनकी शराब की लत भी बढ़ती गई. वो बहुत हद तक नशे में डूब चुके थे. वो आख़िरी बार साल 1992 में आई 'दीदार' में पर्दे पर नज़र आए. कहते हैं कि इस शराब की लत ने ही उनकी जान ले ली. हालांकि, उनकी मौत की असल वजह किसी को नहीं पता. कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने सुसाइड की थी. मगर कोई भी पुख़्ता तौर पर कुछ नहीं कह सकता.