Meena Kumari: बॉलीवुड की 'ट्रैजेडी क्वीन' मीना कुमारी के एक्टिंग और ख़ूबसूरती के दीवानों की कमी नहीं थी. जब दीवानगी होती है तो प्यार भी होता है और स्टार्स की पूंजी उनके फ़ैंस का प्यार ही होती है. फ़ैंस की उस भीड़ में अगर कुछ अच्छे तो कुछ थोड़े अजीब फ़ैंस भी होते हैं. मीना कुमारी का भी एक ऐसा ही फ़ैन था, जो कोई बीटेक, इंजीनियर या सामान्य नौकरी करने वाला नहीं था, बल्कि एक डकैत था, वो भी चंबल का. इसी से जुड़ा एक क़िस्सा आपको बताएंगे, जिसमें इस डकैत ने मीना कुमारी को आधी रात को बियाबान जगंल में घेर लिया और फिर जानिए कि क्या हुआ? किस शर्त पर उसने मीना कुमारी (Meena Kumari) और कमाल अमरोही के क्रू मेम्बर्स को छोड़ा?

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तो चलिए जानते हैं आख़िर कौन था चंबल का वो डाकू जिसने मीना कुमारी (Meena Kumari) को बंदी बना लिया और फिर उन्हें ख़ुद को बचाने के लिए उठाना पड़ा चाकू? इस पूरे वाक्ये का ज़िक्र जर्नलिस्ट विनोद मेहता ने अपनी किताब में किया है.

दरअसल, 1960-70 के दशक में कमाल अमरोही और मीना कुमारी (Meena Kumari) कुछ क्रू मेम्बर्स के साथ 'पाक़ीज़ा' की शूटिंग के लिए मध्य प्रदेश के शिवपुरी इलाक़े में थे, तभी रात के समय जब दोनों उसी इलाक़े से गुज़र रहे थे तभी बियाबान इलाक़े के पास उनकी गाड़ी का पेट्रोल ख़त्म हो गया और उन्होंने गाड़ी साइड लगाकर दिल्ली जाने की सोची, तभी चंबल के डाकुओं के एक गिरोह ने आकर उनकी गाड़ियों को घेर लिया. रात के समय जब हथियारबंद दर्जन भर डाकूओं ने उन्हें घेरा तो सबकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई.

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घेरने के बाद डाकुओं ने उन सबको गाड़ी से बाहर आने को कहा तभी कमाल अमरोही बोले कि तुम अपने सरदार से कहो कि वो हमसे कार में ही आकर मिलें. जैसे ही, कमाल अमरोही ने ये बोला तभी सिल्क का पायजामा कुर्ता पहने एक शख़्स उनकी गाड़ी के पास आया और पूछा कि 'तुम कौन हो?' उन्होंने बोला 'मैं कमाल अमरोही हूं और शूटिंग करने चंबल आया हूं.' 'शूटिंग' सुनते ही वो शख़्स ग़ुस्से में आ गया और सबको पुलिसवाला समझ कर ग़ुस्से से बात करने लगा, क्योंकि उसे लगा कि ये लोग पुलिसवाले हैं और यहां पर हमारा 'शूट' यानि एनकाउंटर करने आए हैं.

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इस ग़लतफ़हमी के चलते उसका रवैय्या कमाल अमरोही के साथ थोड़ा ग़ुस्से वाला हो गया और कमाल अमरोही समझ गए कि वो डाकुओं के चंगुल में फंस गए हैं. हिम्मत जुटाते हुए कमाल अमरोही ने पूछा 'आपका नाम'? तो वो शख़्स बोला 'दस्यु बागी अमृत लाल (Daku Amrit Lal Chambal) सुना है ये नाम तुमने अपनी बंबई में?'

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डाकू अमृत लाल उस ज़माने का चंबल घाटी का सबसे क्रूर और निडर डकैत था, जिसके ऊपर बहुत भारी इनामी राशि थी और जिसके नाम से पुलिस भी कांपती थी. फिर इस ग़लतफ़हमी को दूर करते हुए कमाल अमरोही ने अमृत लाल को बताया कि वो कोई पुलिसवाले नहीं है और न ही गोलीबारी करने आए हैं, उनकी शूटिंग का मतलब फ़िल्म की शूटिंग है. ये सुनते ही डाकू अमृत लाल का व्यवहार नर्म हो गया और कमाल अमरोही जैसी मशहूर शख़्सियत को अपने सामने देखकर ख़ुश हो गया. बातचीत करते हुए वो जान चुका था कि दूसरी गाड़ी में एक्ट्रेस मीना कुमारी बैठी हैं.

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डाकू अमृत लाल को जैसे ही मीना कुमारी के होने का पता चला उसकी दीवानगी उनके प्रति बढ़ गई क्योंकि वो मीना कुमारी की फ़िल्मों का दीवाना था. इसलिए वो मीना कुमारी से मिलने की ज़िद पर अड़ गया और कहा कि मिलने के बाद ही सबको दिल्ली जाने देगा. ख़ुशी में पागल डाकू अमृत लाल ने उस रात सबके लिए नाच-गाने के साथ-साथ खाने-पीने का भी इंतज़ाम कराया और उनकी गाड़ी में पेट्रोल भी उसके ही आदमियों ने भरवाया और फिर सब जाने की तैयारी करने लग गए.

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सबको तैयारी करता देख अमृतलाल फिर सनक गया और बोला कि उसे मीना कुमारी से मिलवा दो. काग़ज़ और पेन का इंतज़ाम न होने के चलते डाकू अमृत लाल ने चाकू मंगाकर कमाल अमरोही और मीना कुमारी के सामने रख दिया. ये देखकर मीना कुमारी सहम गईं. फिर चाकू रखने की वजह पूछने पर उसने कहा कि मीना कुमारी जब उसके हाथ पर चाकू से अपना नाम लिखेंगी तभी यहां से सब लोग जा पायेंगे.

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उसकी ज़िद पर मीना कुमारी ने चाकू तो हाथ उठा लिया, लेकिन उसके हाथ पर चाकू से अपना नाम लिखने की हिम्मत उनकी नहीं हो रही थी. नाज़ुक और प्यारी सी मीना कुमारी ने अपने सभी क्रू मेंंबर्स की जान बचाने के लिए आख़िरकार हिम्मत जुटाई और उसके हाथों पर अपना नाम चाकू से लिख दिया और फिर सब लोग वहां से निकल गए.