बॉलीवुड में दो बड़े कलाकरों के बीच दोस्ती कम ही देखी जाती है, लेकिन बॉलीवुड में दो एक्टर ऐसे भी हैं, जिनकी दोस्ती किसी मिसाल से कम नहीं है. हालांकि, इनमें से एक एक्टर अब इस दुनिया में नहीं है. लेकिन बॉलीवुड में आज भी इन दोनों को उनकी अटूट दोस्ती के लिए जाना जाता है.  

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हम बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) और ओम पुरी (Om Puri) की बात कर रहे हैं. ओम और नसीर की दोस्ती के कई क़िस्से आप पहले भी कई बार पढ़ और सुन चुके होंगे, लेकिन आज हम आपके साथ इन दो जिगरी दोस्तों से जुड़ा एक ऐसा क़िस्सा शेयर करने जा रहे हैं, जो इनकी दोस्ती की गहराई को पेश करता है.

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दरअसल, नसीरुद्दीन शाह और दिवंगत अभिनेता ओम पुरी कॉलेज के दिनों से ही जिगरी दोस्त हुआ करते थे. ओम पुरी आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन नसीर को उनकी कमी हर वक़्त महसूस होती है. ये बात उन्होंने अपनी किताब में भी बताई थी. कॉलेज के दिनों की ये दोस्ती बॉलीवुड में पैर जमाने के साथ और मजबूत होती गई. नसीर, ओम पुरी को अपना जिगरी दोस्त मानते थे तो ओम पुरी भी उनकी दोस्ती की क़ीमत समझते थे.

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नसीरुद्दीन शाह ने साल 2014 में अपनी क़िताब 'And Then One Day: A Memoir' में अपने साथ हुए एक हादसे का जिक्र किया था. ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह की दोस्ती National School of Drama (NSD) के समय से थी. NSD में 4 साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन दोनों Film and Television Institute of India (FTII) पुणे में एक्टिंग की पढ़ाई की. इसके बाद सन 1976 में ये दोनों मुंबई शिफ्ट हो गए. इस दौरान ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह ने साथ में एक एड फ़िल्म भी की थी.

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चलिए अब वो क़िस्सा भी जान लाजिये 

बात साल 1977 की है. बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक श्याम बेनेगल 'भूमिका' फ़िल्म की शूटिंग कर रहे थे. स्मिता पाटिल-अमोल पालेकर स्टारर इस फ़िल्म में ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह भी थे. इस दौरान शूटिंग से फ़्री होने के बाद ये दोनों सेट के पास ही एक ढाबे पर खाना खा रहे थे. तभी ओम पुरी ने देखा कि NSD और FTII में उनके साथ पढ़ने वाला नसीरुद्दीन शाह का बेस्ट फ़्रेंड जसपाल तेज़ी से उनकी ओर आ रहा है.

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ओम पुरी कुछ समझ पाते इतने में जसपाल ने किसी धारदार हथियार से नसीरुद्दीन शाह पर वार कर दिया. इस दौरान जब जसपाल ने नसीरुद्दीन शाह को मारने के लिए दोबारा हाथ उठाया तो ओम पुरी ने देखा कि उसके हाथ में चाकू है. इससे पहले कि वो चाकू से नसीरुद्दीन शाह पर दूसरा हमला करता ओम पुरी ने अपनी जान की परवाह किए बगैर जसपाल का हाथ पकड़ लिया.

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ओम पुरी ने जसपाल को तब तक पकड़े रखा जब तक उसने हाथ से चाकू नहीं छोड़ा. इतने में उन्होंने देखा कि उनका दोस्त नसीर ख़ून से लतपथ है. इसके बाद ओम पुरी किसी तरह नसीरुद्दीन शाह को ढाबे से बाहर लाये और पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने कुछ देर बाद ही जसपाल को गिरफ़्तार कर लिया. इस तरह से ओम पुरी ने अपनी जान पर खेलकर अपने दोस्त नसीरुद्दीन शाह की जान बचाई थी. 

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नसीरुद्दीन शाह किताब में लिखा है कि, 'जसपाल को वो अपना जिगरी दोस्त समझते थे, लेकिन वो उनकी सफ़लता से जलने लगा था. इसी मनोदशा में उसने ये हरकत की थी. इस दौरान उनके दोस्त ओम पुरी ने बिना किसी की अनुमति के पुलिस की गाड़ी में उन्हें अस्पताल पहुंचाया था. वो अपने दोस्त की जान बचाने के लिए कुछ भी कर सकते थे'.