अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर के ख़िलाफ़ शारीरिक शोषण के आरोप लगाये गये थे. इसके बाद से ही फ़िल्म इंडस्ट्री से ताल्लुक रखने वाली कई महिलाएं अपने साथ हुए शारीरिक शोषण पर खुलकर बोलने लगीं.


डायरेक्टर विकास बहल, मॉडल ज़ुल्फ़ी सैयद, गायक कैलाश ख़ेर, AIB के फ़ाउंडर्स तन्मय भट्ट और गुरसिमरन खंबा, रजत कूपर समेत कई लोगों के ख़िलाफ़ अभिनेत्रियों ने शारीरिक शोषण करने के आरोप लगाए हैं.

इसी सूची में एक नाम और आया, आलोकनाथ का.

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फ़िल्ममेकर और लेखक विनता नंदा ने एक फ़ेसबुक पोस्ट द्वारा आलोक नाथ पर 1994 के पॉपुलर शो 'तारा' की शूटिंग के दौरान, रेप का आरोप लगाया. रेप के आरोप लगने के बाद भी आलोकनाथ फ़िल्मों में नज़र आते रहे.


एक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी फ़िल्म #मैं भी के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स नहीं मिल रहे. आलोक नाथ के होने से कोई भी फ़िल्म के साथ जुड़ना नहीं चाहता. फ़िल्म में वो एक जज की भूमिका में नज़र आने वाले थे, जो शारीरिक शोषण के पीड़ितों का पक्ष लेता है.

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विडंबना देखिए, जिस पर ख़ुद रेप का इल्ज़ाम लगा है, वो शारीरिक शोषण के पीड़ितों का पक्ष ले रहा है.


हालांकि अजय देवगन की आने वाली फ़िल्म 'दे दे प्यार दे' में भी वे अहम भूमिका में नज़र आने वाले हैं लेकिन उनकी फ़िल्म को डिस्ट्रीब्यूटर न मिलना एक सकारात्मक संकेत है और इस बात का सुबूत है कि फ़िल्मी इंडस्ट्री में अब भी पीड़ितों की आवाज़ सुनी जाती है.

सवाल तो उठता है कि फ़िल्म बनाने वाले क्या सोचकर ऐसे अभिनेता को काम दे देते हैं, जिन पर किसी ने बलात्कार जैसे संगीन जुर्म का आरोप लगाया है. माना कि कई इल्ज़ाम ग़लत हो सकते हैं मगर किसी दोषी अभियुक्त को काम देने का सीधा मतलब तो यही निकलता है कि इंडस्ट्री उनका मनोबल बढ़ा रही है.


हम आशा करते हैं कि फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग इसी तरह के सकारात्मक संदेश देते रहेंगे.