शहर की बड़ी इमारतें जब शांत और सुनसान होती हैं, तो ऐसा लगता है कि वहां कोई राज़ दबा कर रखा गया है. वो राज़ चीखना चाहता है, चिल्लाना चाहता है, पर कंक्रीट की उन दीवारों से बाहर नहीं आ पाता. कई कवियों ने अपनी कविताओं में शहरों की इमारतों को पत्थर और सीमेंट का जंगल तक कह डाला है. अब बात करते हैं सर्वाइवल की. इस विषय पर आपने कई हॉलीवुड फ़िल्में देखी होंगी, जिनमें हीरो लाख जतन कर खुद को ज़िन्दा रखने की कोशिश करता है और अंततः सफ़ल हो जाता है. हालांकि ये विषय अभी बॉलीवुड के लिए अनछुआ है, लेकिन एक दो बार इस पर फ़िल्में बनाने की कोशिश की गई हैं.

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अब इस विषय को नए तरीके से दिखाने का साहस लेकर आये हैं विक्रमादित्य मोटवाने. अगर आप इस नाम से परिचित नहीं हैं, तो आपको बता दें कि उन्होंने उड़ान और लूटेरा जैसी शानदार फ़िल्में बनाई हैं. Trapped नाम की ये फ़िल्म कहानी है उस आदमी को, जो बहुमंजिली ईमारत के किसी फ्लैट में बंद हो जाता है. फ़िल्म के दो मिनट के ट्रेलर में हम वाकई डर जाते हैं कि अगर हमारे साथ ऐसा होता है, तो हम क्या करेंगे. ये बातें सोचने पर मजबूर कर देती हैं.

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फ़िल्म में लीड रोल में हैं राजकुमार राव. राजकुमार राव के कंधों पर इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी गई है कि पूरी फ़िल्म को उन्हें खींच कर अंत तक ले जाना है. ये जोख़िम उठा पाना सबके बस की बात नहीं है. आप ज़रा सोचिये, पूरे दो घंटे, एक ही हीरो और बस एक छोटा सा फ्लैट. क्या वाकई ये आइडिया लोगों को बांध पाने में कामयाब हो पायेगा? राजकुमार राव की एक्टिंग में इतना दम तो ज़रूर है कि वो अपने दम पर लोगों को थिएटर में बैठने के लिए मजबूर कर सकते हैं.

पहले आप ये ट्रेलर देख लीजिये:

कभी सोचा था आपने कि ऐसा भी हो सकता है! भाग-दौड़ भरी इस ज़िंदगी में सब से कट जाना और एक कमरे में अकेले बंद हो जाना, जहां न किसी की शक्ल दिखे और न ही किसी की आवाज़ आये, ये मौत से कम नहीं है. अब इस दमदार ट्रेलर के बाद हमें तो इस फ़िल्म का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा.

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