‘बीत गया वो सफ़र जिसमें तेरा साथ था

 अब क्या करूं मंज़िल पर जो तू नहीं’

ये सच नहीं है. मैं यक़ीन ही नहीं कर सकता. कैसे कर लूं इस बात का एतबार कि इरफ़ान ख़ान हमारे बीच अब नहीं रहे. महज़ 53 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. ये कैसी ख़बर है? मानो लगता है कि अभी कोई कह देगा कि ये सिर्फ़ एक कोरी अफ़वाह थी. लेकिन कोई कुछ नहीं कह पा रहा. सबकी हलक सूख चुकी है. सब सदमें में हैं जैसे कोई अपना अब कभी लौटकर वापस नहीं आएगा. 

Source: indianexpress

अपना? इरफ़ान ख़ान एक एक्टर ही तो था, फिर क्यों सबकी आंखे नम हैं? क्यों किसी का काम में दिल नहीं लग रहा? क्यों हवा में ये अजीब से बेचैनी छाई है? 

सच पूछें तो इन सवालों का जवाब नहीं है. इरफ़ान खान के साथ रिश्ता कभी सवालों और जवाबों का रहा ही नहीं. उनसे तो लोगों का अलग ही राब्ता था. दुनिया इरफ़ान साहब को ‘मक़बूल’ कर चुकी थी, शायद यही इस अदाकार के सफ़र का ‘हासिल’ है. 

हर किरदार को ज़िंदा करने वाला आज ख़ुद... ये साल का दोष है, बीमारी का या नसीब का, जिसने अदाकारी के सबसे चमकदार सितारे को बुझा दिया. सांसो का चिराग तो बुझ गया लेकिन इरफ़ान ने चंद सालों के अनगिनत पलों से जो रिश्तों का धागा बुना था, वो इस क़दर मज़बूत हो चुका है कि उनके जाने पर हर शख़्स मायूसी में फंस सा गया है. बहुत कुछ कहना है पर नहीं कह पा रहे. फिर भी अपने चहेते को आख़िरी सलाम देने वालों का हुज़ूम उमड़ पड़ा है. सोशल मीडिया पर लोगों ने अपना दिल निकाल कर रख दिया है. 

‘सांसे छोड़कर यादें दे गया वो 

मतलबी हिसाब का बड़ा पक्का था’