‘अरे अछूत नहीं भूत हो...’ इस डॉयलाग पर छूटी हंसी के पीछे सरकारी कागज़ की गहरी चोट है. दरअसल, पंकज त्रिपाठी की नई फ़िल्म 'काग़ज़' का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है. फ़िल्म में पंकज का किरदार 'लाल बिहारी मृतक' के जीवन से प्रेरित है, जिसे कागज़ों में मृत साबित कर दिया गया और वो अपने ज़िंदा होने की लड़ाई लड़ रहा है.

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‘सरकारी कागज़ झूठ नहीं बोलता है...’ 2 मिनट 39 सेकेण्ड के इस ट्रेलर में ये लाइन एक इंसान के ज़िंदा होने के सच को झुठलाती दिख रही है. 

फ़िल्म एक सटायरिकल कॉमेडी है और ये ट्रेलर में नज़र भी आता है. हल्की-फुल्की कॉमेडी के साथ शुरू हुआ ट्रेलर धीरे-धीरे आंखे नम कर जाता है और आपको पता भी नहीं चलता. ज़िंदा आदमी को मार देने वाले सिस्टम के ख़िलाफ़ 18 साल लम्बी लड़ाई को पंकज का क़िरदार धर्मयुद्ध समझता है. 

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इस दौरान उसे मालूम पड़ता है कि ये उसके अकले की लड़ाई नहीं है, बल्कि इस सिस्टम की मार से पहले भी कई ज़िंदा लोग मृतक बन चुके हैं. बस फिर वो ऐसे सभी लोगों का संगठन बना लेता है और मिलकर ख़ुद के ज़िंदा होने की लड़ाई लड़ता है.

पंकज के क़िरदार की ज़ुबानी बात बस इतनी है कि ‘आप कागज़ की सुनेंगे या इंसान की सुनेंगे. दिल इंसान के सीने में धड़कत है या कागज़ में धड़कत है…’ ट्रेलर दिलचस्प है और लाल बिहारी मृतक की व्यथा और संघर्ष को ज़ाहिर करता है.

बता दें, फ़िल्म का निर्देशन सतीश कौशिक ने किया है. ये फ़िल्म 7 जनवरी को Zee5 पर रिलीज़ होगी. इस फ़िल्म में मोनल गुज्जर, मीता वशिष्ठ, अमर उपाध्याय और सतीश कौशिक भी नज़र आएंगे. Zee5 के अलावा ये फ़िल्म उत्तर प्रदेश के कुछ थियेटर्स में भी रिलीज़ होगी.