Regional Films On Mother: पिछले कुछ सालों में क्षेत्रीय फ़िल्मों (Regional Films) की पॉपुलैरिटी में ख़ासा इजाफ़ा हुआ है. इसके लिए हम ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का भी शुक्रिया अदा कर सकते है, जो हर भाषा के कंटेंट को अपने प्लेटफॉर्म पर स्पेस दे रहे हैं. यही वजह है कि क्षेत्रीय सिनेमा (Regional Cinema) ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक अपना विस्तार कर रहा है. इसके साथ ही क्षेत्रीय फ़िल्ममेकर्स भी अपनी क्रिएटिविटी दिन ब दिन बढ़ाते जा रहे हैं और कई संवेदनशील और अहम मुद्दों पर फ़िल्में बना रहे हैं. ऐसी कई क्षेत्रीय फ़िल्में हैं, जो मां की ममता और उनके असीमित प्यार को लेकर भी बनी हैं. 

तो आइए क्यूं न इस बार आपको बता देते हैं ‘मां’ पर बनी उन क्षेत्रीय फ़िल्मों (Regional Films On Mother) के बारे में, जो आपको ज़रूर देखनी चाहिए.

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1. हिरकणी

ये ऐतिहासिक मराठी ड्रामा फ़िल्म साल 2019 में आई थी, जो कि छत्रपति शिवाजी के शासन में रायगढ़ क़िले के समीप रहने वाली एक बहादुर मां हिरकणी की ज़िंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है. मूवी में रायगढ़ के द्वार दिन भर के लिए बंद हो जाने के बाद, एक दूधवाली हिरकणी अपने बच्चे को घर वापस लाने के लिए एक खड़ी चट्टान से नीचे उतरने का फ़ैसला करती है. फ़िल्म में सोनाली कुलकर्णी और चिन्मय मांडलेकर अहम भूमिका में हैं. इस मराठी फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर 12 करोड़ रुपये की कमाई की थी.

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2. अम्मा कणक्कु

ये तमिल फ़िल्म साल 2016 में आई थी, जोकि हिंदी फ़िल्म ‘नील बटे सन्नाटा‘ की रीमेक थी. ये फ़िल्म एक यंग विधवा मां शांति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी बेटी की क्लास जॉइन कर लेती है ताकि वो उसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सके. फ़िल्म में शांति दूसरों के घर में बतौर हाउस हेल्प काम करती है, ताकि वो अपनी बेटी को अच्छे से अच्छी एजुकेशन दे सके. ये फ़िल्म मां-बेटी के बीच के रिश्ते को बखूबी बयां करती है. (Regional Films On Mother)

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3. बकेट लिस्ट 

ये मराठी फ़िल्म 25 मई, 2018 को रिलीज़ हुई थी. इस फ़िल्म से माधुरी दीक्षित ने मराठी फ़िल्म इंडस्ट्री में डेब्यू किया था. इस फ़िल्म की शुरुआत ‘मधुरा’ (माधुरी दीक्षित) से होती है, जोकि एक मिडल एज की हाउसवाइफ़ हैं और अपने फ़ैमिली मेंबर्स के लिए हर दिन तरह-तरह का खाना बनाती हैं. ये भी देखा जाता है कि उनका वजूद फ़ैमिली की ख़ुशियों के लिए ही समर्पित है. हालांकि, वो एक 20 वर्षीय हार्ट डोनर की इच्छा को पूरी करने का फ़ैसला लेती हैं और ख़ुद को डिस्कवर करने की यात्रा पर चली जाती है. उसे एहसास होता है कि ऐसी कई सारी चीज़ें थीं, जो उसने अब तक मिस कर दी हैं. 

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4. पोस्तो

साल 2017 में आई इस बंगाली फ़िल्म में मिमी चक्रवर्ती और जीशु सेनगुप्ता भी हैं. ये फ़िल्म दुनियाभर के 100 थिएटर्स में रिलीज़ हुई थी. ये फ़िल्म एक छोटे लड़के पोस्तो के पेरेंट्स और ग्रैंडपेरेंट्स के बीच हुई बहस पर घूमती है. काफ़ी सालों तक ग्रैंडपेरेंट्स के द्वारा परवरिश करने के बाद, बच्चे के पेरेंट्स उसे अपने साथ ले जाना चाहते हैं. ये एक कामकाजी मां के अपने बच्चे के साथ जटिल संबंधों को भी छूती है, क्योंकि वो उसके साथ एक बॉन्डिंग बनाने की कोशिश करती है. (Regional Films On Mother)

5. पिचैककरण

ये तमिल फ़िल्म एक अरुल (विजय एंटनी) नाम के एक करोड़पति बिज़नेसमैन के बारे में है, जो अपनी मरती हुई मां को बचाने के लिए एक धार्मिक भेंट के रूप में भिखारी के रूप में 48 दिनों तक गुप्त जीवन व्यतीत करता है. उसकी मां का एक्सीडेंट हो जाता है और वो कोमा में चली जाती हैं. उसे हॉस्पिटल में एक साधु मिलता है, जो उसे बताता है कि उसकी मां की जान तभी बच सकती है, जब वो 48 दिन बिना अपनी पहचान का ख़ुलासा किए हुए बतौर भिखारी अपना जीवन व्यतीत करे. क्या वो अपनी मां की जान बचा पाएगा? इसे जानने के लिए आपको ये फ़िल्म देखनी पड़ेगी. 

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6. छत्रपति

इस तेलुगु मूवी को एस. एस. राजामौली ने डायरेक्ट किया था, जिसमें प्रभास लीड रोल में थे. इस फ़िल्म ने क़रीब 22 करोड़ रुपये की कमाई की थी. फ़िल्म में बचपन में ‘शिवाजी’ अपनी सौतेली मां से अपने बचपन में एक फ़ायर एक्सीडेंट के दौरान अलग हो जाता है. वो एक तटीय क्षेत्र में बड़ा होता है और वहां का नेता बन जाता है. फिर वो अपनी मां को खोजता है. वो सालों बाद अपनी मां और भाई से कैसे मिलता है, ये मूवी उसी के बारे में है.

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 7. राम

इस फ़िल्म की कहानी कोडईकनाल में रहने वाले एक मां-बेटे पर आधारित है. ‘राम‘ एक मेंटली प्रभावित टीनेजर है, जो अपनी मां के ऊपर निर्भर है. उसकी पूरी दुनिया अपनी मां के चारों ओर घूमती है. राम की मां का ख़ून कर दिया जाता है. इसके बाद राम क्या एक्शन लेता है, ये आपको फ़िल्म देखने के बाद पता चलेगा. 

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तो फिर देर किस बात की आज ही देख लो.