अजय देवगन(Ajay Devgn) और बॉलीवुड(Bollywood) की मोस्ट अवेटेड फ़िल्म Runway 34 का ट्रेलर रिलीज़ हो चुका है. इसके ट्रेलर में एक ऐसी फ़्लाइट की कहानी है जो ख़राब मौसम के चलते मुसीबत में फंस जाती है और पायलट को यात्रियों और अपनी जान मुश्किल में डालकर किसी तरह उसे लैंड करवाना पड़ता है.

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ट्रेलर धांसू है और फ़िल्म की कहानी भी काफ़ी दिलचस्प है. इसमें अमिताभ बच्चन(Amitabh Bachchan) और रकुल प्रीत सिंह(Rakul Preet Singh) जैसे कलाकार भी हैं. ये फ़िल्म आने वाली 29 अप्रैल को रिलीज़ होगी. इसकी कहानी एक रियल घटना पर बेस्ड है. चलिए जानते हैं उस दिल दहला देने वाली की कहानी के बारे में जिस पर रनवे 34 को बनाया गया है.

दोहा से कोच्चि आ रही थी फ़्लाइट

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18 अगस्त 2015 को जेट एयरवेज की फ़्लाइट 9W-555 दोहा से कोच्चि के लिए निकली थी. उसके साथ भी यही हुआ था जिस पर रनवे 34 की कहानी गढ़ी गई है. ये फ़्लाइट कतर से तो आराम से उड़ान भरने में कामयाब रही लेकिन भारत पहुंचते ही इसका सामना ख़तरनाक मौसम से हुआ.

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तिरुवनंतपुरम डायवर्ट किया गया

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विजिबिलिटी कम थी, तेज़ बारिश-तूफ़ान सब इसके दुश्मन बन इस फ़्लाइट पर कहर बरपाने को तैयार थे. विमान में 141 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे. फ़्लाइट हवा में इधर उधर घूम रही थी लेकिन रनवे दिखाई न देने के चलते उसे कोच्चि में लैंड करने की परमिशन नहीं मिली. इसके बाद इसे तिरुवनंतपुरम डायवर्ट कर दिया गया. 

फ़्यूल होने लगा था कम

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मगर यहां का हाल भी वैसा ही था, ख़राब मौसम कम रौशनी के चलते यहां भी रनवे साफ़ नज़र नहीं आ रहा था. पायलट ने दो बार लैंडिंग की नाकामयाब कोशिश की. तीसरी और अंतिम बार(कुछ रिपोर्ट्स में 7वां अटेंप्ट बताया गया है) प्रयास करने से पहले पायलट ने ATC को बताया कि उसके पास बस 250 किलोग्राम फ़्यूल बचा है और इसके साथ वो एक अंतिम प्रयास करना चाहता है. 

पायलट की May Day कॉल

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इसी के साथ ही उसने ATC को वो शब्द कहे जो शायद ही कोई पायलट कहना चाहता है May Day(वैसे पहले इस फ़िल्म का नाम भी यही था जिसे बाद में बदल दिया गया). पायलट का मे डे कहना मतलब भारी मुसीबत आन पड़ना यानी आपातकाल. ऐसे में एटीसी कुछ नहीं करता जो करना होता है पायलट को ही अपनी सूझबूझ से करना होता है. ख़ैर पायलट ने ये कहकर किसी तरह लैंडिंग करवाने के लिए आगे बढ़ा. उस फ़्लाइट और लोगों की क़िस्मत अच्छी थी आख़िरी अटेंप्ट में फ़्लाइट लैंड हो गई और सभी लोगों की जान बच गई.  

बैठा इंक्वायरी कमीशन

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इसके बाद अगले दिन के अख़बार में उस जेट एयरवेज की फ़्लाइट के दोनों पायलट की तस्वीर छाप उन्हें हीरो करार दे दिया गया था. मगर इतना सब हो जाने के बाद तो इंक्वायरी तो बनती है. हुआ भी ऐसा, जांच हुई कमेटी के सामने पायलट और दूसरे पक्ष की दलील सुनी गई. रिपोर्ट बताती हैं कि पायलट को ऐसा जोखिम भरा काम करने लिए सज़ा के तौर पर डिमोशन मिला, तो कुछ का कहना है कि उन्हें कोई सज़ा नहीं दी गई थी.

Runway 34

वहीं एविएशन मिनिस्ट्री की जांच में एयरलाइन भी साफ़ बच निकली. यहां तक कि जेट एयरवेज ने तो फ़्यूल कम होने की बात को नकार दिया था. उनका कहना था कि विमान में फ़्यूल पर्याप्त मात्रा में था, नियमों के हिसाब से.

अब असल में क्या हुआ था क्या नहीं, इन सारे सवालों के जवाब शायद 29 अप्रैल को पता चल जाएं, Runway 34 की रिलीज़ के साथ.