बॉलीवुड के किंग ख़ान शाहरुख़ जितने अच्छे एक्टर हैं उतने ही अच्छे पति और पिता भी. उनके तीन बच्चे हैं जिन्हें वो बहुत ही प्यार करते हैं. इसके साथ ही वो अपने बच्चों को वो जीवन के वो सबक भी सिखाते हैं जो कभी उन्होंने अपने पिता से सीखे थे. शाहरुख़ के पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे, उनका नाम मीर ताज मोहम्मद ख़ान था.

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शाहरुख़ ख़ान(Shah Rukh Khan) ने एक इंटरव्यू में अपने पिता को याद करते हुए अपने फ़ैंस से उनके द्वारा दी गई सीख शेयर की थीं. उन्होंने बताया की कैसे वो छोटी-मोटी चीज़ों से उन्हें कुछ सीख लेने की प्रेरणा देते थे. शाहरुख़ ने अपने पिता से 4 चीज़ों के ज़रिए चार महत्वपूर्ण सबक सीखे थे. उन्हें हम आज आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं.

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1. शतरंज

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शाहरुख़ ख़ान को उनके एक जन्मदिन पर एक फटा हुआ शतरंज का बोर्ड दिया था, इसे देते हुए उन्होंने कहा था कि- 'आप शतरंज से बहुत सी चीज़ें सीख सकते हैं. शतरंज के ज़रिए आप सीख सकते हैं कि साथ मिल जुलकर काम(टीम वर्क) कैसे करना है. आप सीख सकते हैं कि ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी पीछे भी हटना पड़ता है.'

सबसे बड़ा सबक देते हुए उन्होंने कहा था कि इससे आप ये भी सीख सकते हैं कि जीवन में कोई भी इंसान छोटा नहीं होता, इसलिए सबकी इज्जत करनी चाहिए. जैसे शतरंज में प्यादे भी काम आते हैं वैसे कोई भी कभी भी काम आ सकता है.

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2. टाइपराइटर

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शाहरुख़ को उनके पिता ने एक टाइपराइटर भी गिफ़्ट किया था. इसे देते हुए उन्होंने कहा- 'टाइपराइटर पर जब कोई आदमी लिखता है और ग़लत लिख देता है तो फिर उसको मिटाने में काफ़ी परेशानी होती है. इसलिए उसपर आपको बहुत ही ध्यान से लिखना होता है आप ग़लती नहीं कर सकते हैं. इसलिए जो भी काम करो ये सोच कर करो कि शायद ये काम करने का मौक़ा आपको फिर न मिले और ये आपका आख़िरा काम है.'

3. कैमरा

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ताज मोहम्मद जी ने अपने बेटे को एक ख़राब कैमरा भी दिया था. उसके Viewfinder से सब कुछ साफ़ दिखता था, लेकिन उससे फ़ोटो क्लिक नहीं कर सकते थे. इसे देते हुए उन्होंने शाहरुख़ को बताया था कि- 'जैसे इस कैमरे से आप सब देख तो सकते हैं, लेकिन तस्वीर नहीं खींच सकते, वैसे ही जीवन में ये ज़रूरी नहीं की आपकी हॉबी फिर चाहे वो सिंगिंग हो, पेंटिंग हो या फिर डांसिंग हर किसी को पसंद आए. मगर फिर भी तुम्हें अपनी हॉबी को तराशना होगा क्योंकि जब तुम अवसाद में होगे तब ये तुम्हारे बहुत काम आएगी. ये तुम्हारी दोस्त बन जाएगी.'

4. सेंस ऑफ़ ह्यूमर

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उनके पिता ने शाहरुख़ ख़ान को कहा था कि एक इंसान में अच्छा सेंस ऑफ़ ह्यूमर और बच्चे की तरह मासूमियत होनी बहुत ज़रूरी है.

पिता से मिले इन चारों सबकों को शाहरुख़ ख़ान ने अपने जीवन में आत्मसात कर लिया है.