सोनू सूद ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान हज़ारों-लाखों प्रवासी मज़दूरों की मदद की. उन्हें घर भेजने का इंतज़ाम किया, खाने-पीने की व्यवस्था की. सिर्फ़ इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के ज़रिए जिसने भी उनसे मदद मांगी, उन्होंने हमेशा आगे बढ़कर ज़रूरतमंदों की सहायता की. हालांकि, इन सबके बावजूद ट्रोलर्स ने उन्हें नहीं बख़्शा. कुछ लोगों ने सोनू सूद से उनके सभी परोपकारी कामों को लेकर सवाल करना शुरू कर दिया. कुछ ट्रोलर्स ने तो उन्हें 'फ़्रॉड' तक कह डाला, जिस पर अब एक्टर ने प्रतिक्रिया दी है.

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हाल ही में जर्नलिस्ट बरखा दत्त को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान सोनू सूद ने कहा कि, ‘हो सकता है आप ऐसा इसलिए कर रहे होंगे क्योंकि ये आपका पेशा है और इसके लिए आपको भुगतान किया जा रहा होगा. लेकिन, ये मुझे एफ़ेक्ट नहीं करता है और मैं जो कर रहा हूं वो करता रहूंगा.'

सोनू ने ख़ुद को फ़्रॉड कहे जाने पर भी रिएक्ट किया. उन्होंने कहा, ‘उन लोगों के लिए जो दावा करते हैं कि मैं कुछ नहीं कर रहा हूं, मेरा जवाब है कि मेरे पास 7,03,246 लोगों का डेटाबेस है, जिनकी मैंने मदद की है और जिनके पते, फ़ोन नंबर, आधार कार्ड नंबर मेरे पास हैं. जिन छात्रों की मैंने विदेश से आने में मदद की है, मेरे पास उनके सभी विवरण हैं. मैं स्पष्ट नहीं करना चाहता, लेकिन मेरे पास डेटा है. मुझे ट्रोल करने के बजाय, बाहर जाओ और किसी की मदद करो.'

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बता दें, ये पहली बार नहीं है, जब सोनू सूद के इरादों पर सवाल खड़े किए गए हों. इससे पहले उन पर आरोप लगा था कि वो ये सब काम राजनीति में आने के लिए कर रहे हैं. उस वक़्त भी उन्होंने कहा था कि फ़िलहाल उनकी राजनीति में आने की कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि एक एक्टर के रूप में अभी बहुत काम करना बाकी है.

उन्होंने कहा था कि, ‘अगर मैं राजनीति में आता हूं, तो मैं अपना 100 फ़ीसदी दूंगा. मैं ये सुनिश्चित करूंगा कि किसी को कोई समस्या न हो. उनकी समस्याएं हल करने के लिए समय चाहिए इसलिए, मुझे लगता है कि मैं फ़िलहाल इसके लिए तैयार नहीं हूं. मुझे लगता है कि चूंकि मैं किसी के प्रति अभी जवाबदेह नहीं हूं इसलिए ज़्यादा खुले ढंग से काम कर सकता हूं. मुझे किसी से या किसी भी पार्टी से ये पूछने की ज़रूरत नहीं है कि मुझे क्या करना चाहिए. मैं अपनी मर्ज़ी से फ़ैसला करता हूं.’