'प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा...' इस डायलॉग और इसे बोलने वाले से कौन नहीं वाकिफ़ है. प्रेम चोपड़ा (Prem Chopra), वो एक्टर जो पर्दे पर अपने नाम के विपरीत क़िरदारों को जीता था.  वो बॉलीवुड के सबसे बड़े विलन में से एक हैं. उन्होंने पिछले 6 दशकों में क़रीब 380 फ़िल्मों में काम किया है. मगर उनका एक डायलॉग जो आज भी सबकी ज़ुबान पर चढ़ा है, वो है 'प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा...'

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मगर क्या आप जानते हैं कि जिस फ़िल्म में उन्होंने ये मशहूर डायलॉग बोला था, उसे प्रेम चोपड़ा पहले करना ही नहीं चाहते थे. साथ ही, उन्हें ये फ़ेमस डायलॉग कैसे मिला? आज हम आपको इसी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प क़िस्सा बताएंगे.

फ़िल्म नहीं करना चाहते थे प्रेम चोपड़ा, राज कपूर ने की ज़बरदस्ती

दरअसल, ये बात 70 के दशक की है. प्रेम चोपड़ा बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुके थे. उस वक़्त राज कपूर अपने बेटे ऋषि कपूर को बतौर हीरो लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे. फ़िल्म थी 'बॉबी'. इसी फ़िल्म से डिंपल कपाड़िया का भी बॉलीवुड डेब्यू हुआ था. 

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इसी फ़िल्म के लिए राज कपूर ने प्रेम चोपड़ा को एक सपोर्टिंग क़िरदार निभाने को कहा. मगर प्रेम इस बात के लिए तैयार नहीं थे. वजह थी कि वो उस वक़्त बड़े-बड़े हीरो के अपोज़िट भूमिकाएं निभा रहे थे. ऐसे में उन्हें एक छोटा रोल करना ठीक नहीं लग रहा था. 

मगर राज कपूर ने उनकी एक बात नहीं सुनी. उन्होंने कहा, 'मुझे फ़र्क नहीं पड़ता. आपको ये करना ही होगा.'

शराब के नशे में मिला ये डायलॉग

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प्रेम चोपड़ा ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि राज कपूर ने उन्हें फ़िल्म की स्क्रिप्ट नहीं दी. उन्होंने दिया तो बस ये डॉयलाग. वो कहते हैं, 'राज कपूर को शराब पीना पसंद था, एक दिन हम साथ बैठे. मैं उनसे फ़िल्म की स्क्रिप्ट देने के लिए कहता रहा, ताकि डायलॉग्स सीख सकूं. आखिर ये राज कपूर की फ़िल्म थी!' 

मगर उन्होंने नहीं दी. राज कपूर ने बस इतना कहा, 'बताएंगे बताएंगे, फुर्सत से'. उन्होंने फ़िल्म के बारे में बस इतना बताया कि फ़िल्म में एक युवा जोड़ा भाग गया है और मुझे उन्हें पकड़ना है.' साथ ही मुझे कहना होगा, 'प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा'

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हालांकि, प्रेम उनकी बात को समझ नहीं पाए. वो ये फ़िल्म नहीं करना चाह रहे थे. मगर एक्टर प्रेम नाथ ने उन्हें भरोसा दिलाया कि ये फ़िल्म अच्छा करेगी. इसके बाद वो तैयार हुए. जब पर्दे पर प्रेम चोपड़ा ने ये डायलॉग बोला, तो ग़ज़ब ही हो गया. हर किसी की ज़ुबान पर ये लाइन चिपक गई.

प्रेम चोपड़ा कहते हैं कि ये डायलॉग इतना फ़ेमस हो चुका है कि आज भी वो जहां जाते हैं, लोग ये  डायलॉग या तो ख़ुद बोलते हैं या फिर उन्हें कहने के लिए कहते हैं. ये मेरे दिल के इतने क़रीब है कि मेरी किताब का नाम भी है 'प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा.'