साल 2022 की सबसे बड़ी हिट फ़िल्मों में से एक ‘कांतारा’ देशभर के दर्शकों को काफ़ी पसंद आई. इस कन्नड़ फ़िल्म ने वर्ल्डवाइड क़रीब 446 करोड़ रुपये की कमाई करके बॉक्स ऑफ़िस के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए. फ़िल्म का बजट महज 16 करोड़ रुपये है. इसी तरह की एक फ़िल्म साल 2018 में भी रिलीज़ हुई थी, जिसका नाम तुंबाड (Tumbbad) था. ये फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर ज़्यादा सफल तो नहीं हो पाई, लेकिन ये आज भी दर्शकों की फ़ेवरेट मूवीज़ की लिस्ट में टॉप पर है. इसके पीछे कई कारण हैं. 

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दरअसल, ‘कांतारा’ की ज़बरदस्त कामयाबी के बाद सोशल मीडिया पर ‘तुंबाड’ और ‘कांतारा’ के फ़ैन्स आपस में भिड़ गये थे. कोई ‘कांतारा’ को बेहतर बताता तो कोई ‘तुंबाड’ को. फ़ैंस की इस लड़ाई के बीच जब Tumbbad के क्रिएटिव डायरेक्टर आनंद गांधी ने एंट्री मारकर Kantara की आलोचना की तो इसके फ़ैंस का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. 

आनंद गांधी ने लिखा, ‘तुंबाड’ के आगे ‘कांतारा’ कुछ भी नहीं है. तुंबाड बनाने के पीछे मेरा आइडिया था. इसमें हमने टॉक्सिक मर्दानगी और पारलौकिक चीज़ों के आतंक को दिखाया था, जबकि ‘कांतारा’ इन्हीं चीज़ों को बढ़ावा देने वाली फ़िल्म है. आनंद के इस बयान के बाद ‘कांतारा’ के फैंस ने उन्हें आंकड़ों पर नज़र डालने की नसीहत दे डाली. साथ ही उन्हें कांतारा के 400+ करोड़ रुपये और तुंबाड के 13.57 करोड़ रुपये का अंतर भी समझा दिया. 

तुंबाड को बनने में लगे 21 साल 

निर्देशक राही अनिल बार्वे ने साल 1997 में Tumbbad की कहानी पर काम करना शुरू किया था. तब वो महज 18 साल के थे. साल 2008 तक अनिल कहानी पर आधा काम हो चुके थे. इस बीच उन्होंने किसी तरह फ़िल्म बनाने के लिए प्रोड्यूसर भी ढूंढ निकाला और लीड रोल में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को साइन कर लिया. लेकिन कुछ समय बाद प्रोड्यूसर ने फ़िल्म छोड़ और नवाज भी फ़िल्म से निकल गए. आख़िरकार साल 2010 में अनिल ने क़रीब 700 पन्नों की स्टोरीलाइन तैयार की और इसके दो साल बाद ख़ुद ही फ़िल्म को फ़ाइनेंस करने का फ़ैसला किया.

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राही अनिल बार्वे ने साल 2012 में फ़िल्म में लीड रोल के लिए सोहम शाह को कास्ट किया. विनायक के किरदार के लिए सोहम को क़रीब 10 किलो वजन भी बढ़ाना पड़ा था. फ़िल्म को 120 दिनों में शूट किया गया था, जब फ़िल्म बनकर तैयार हुई तो डायरेक्टर इससे संतुष्ट नहीं थे. इसके बाद उन्होंने फ़िल्म दोबारा लिखी और नए सिरे से दोबारा शूटिंग की. ऐसे में फ़िल्म 2015 तक बनकर तैयार हुई. इस तरह से Tumbbad को बनने में पूरे 6 साल लग गए. वहीं फ़िल्म में दिखाए गए गर्भ गृह के हस्तर वाले सीन बिना किसी VFX के तैयार किये गए थे. 

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तुंबाड के बनने की कहानी भी है बेहद ख़ास 

दरअसल, साल 1993 में राही अनिल बार्वे के दोस्त ने उन्हें एक वाइल्डलाइफ़ सेंचुरी की कहानी सुनाई थी. ये एक ऐसी घटना थी जो वाइल्डलाइफ़ सेंचुरी के किसी कर्मी के साथ घटी थी. कहानी सुनकर अनिल हैरान रह गए. इसी आइडिया पर उन्होंने फ़िल्म बनाने का फ़ैसला किया. इसके 4 साल बाद अनिल ने कहानी पर काम शुरू कर दिया था. इस हिसाब से देखा जाए तो फ़िल्म का कॉन्सेप्ट 25 साल पुराना है. वहीं अनिल ने फ़िल्म का टाइटल मराठी नोवल ‘तुंबाड़चे खोट’ से लिया है.

आख़िर क्या ख़ासियत है तुंबाड?

महज 5 करोड़ रुपये के बजट में बनी Tumbbad ने बॉक्स ऑफ़िस पर कुल 13.57 करोड़ रुपये की कमाई की थी. आंकड़ों के हिसाब से फ़िल्म सुपरहिट थी, लेकिन इस फ़िल्म को जो चीज़ ख़ास बनाती है वो है इसकी बेहतरीन कहानी, ज़बरदस्त स्क्रीनप्ले और शानदार सिनमेटोग्राफ़ी. इनके अलावा भी फ़िल्म कई मायनों में एक मास्टर पीस है.  

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जीते कई बड़े अवॉर्ड्स 

सोहम शाह स्टारर ‘तुंबाड’ का प्रीमियर ‘वेनिस फ़िल्म फ़ेस्टिवल’ में हुआ. इस फ़ेस्टिवल में जाने वाली ये पहली भारतीय फ़िल्म थी. ये फ़िल्म हर मामले में एक मास्टर पीस फ़िल्म है. इस फ़िल्म ने कुल 21 नेशनल और इंटरनेशनल अवॉर्ड्स अपने नाम किये. 

Filmfare Awards- बेस्ट सिनेमेटोग्राफ़ी, बेस्ट आर्ट डायरेक्शन और बेस्ट साउंड डिज़ाइन.
Critics Choice Film Awards (India)- बेस्ट सिनेमेटोग्राफ़ी, बेस्ट प्रोडक्शन डिज़ाइन और बेस्ट बैकग्राउंड स्कोर. 
Screen Awards- बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट और बेस्ट सिनेमेटोग्राफ़ी.
CinemAsia Film Festival- बेस्ट फ़िल्म. 
Zee Cine Awards- बेस्ट प्रोडक्शन डिज़ाइन.
Grossmann Fantastic Film and Wine Festival- Vicious Cat- बेस्ट फ़ीचर फ़िल्म. 
International Indian Film Academy Awards- बेस्ट स्पेशल इफ़ेक्ट्स और बेस्ट साउंड रिकॉर्डिंग.
Screamfest Horror Film Festival- बेस्ट पिक्चर और बेस्ट स्पेशल इफ़ेक्ट्स.
Sitges Film Festival- बेस्ट फ़िल्म (फ़ोकस एशिया) और बेस्ट सिनेमेटोग्राफ़ी.
FOI Online Awards- बेस्ट सिनेमेटोग्राफ़ी और बेस्ट मेक-अप एंड हेयर स्टाइल.

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