संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह भारत में कोई है तो वो हैं ए. आर. रहमान. उन्होंने अपने अद्भुत संगीत के ज़रिये लोगों को प्यार, दर्द, देश भक्ति जैसी सभी भावनाओं को व्यक्त करने का मौक़ा दिया है. एक नज़ीर पेश है:

मस्ती के मूड में ‘मस्ती की पाठशाला’, सफ़र में ‘माही वे’ लोगों का हमसफ़र बन जाता है, ‘मां तूझे सलाम’ से देश भक्ति का ज़ज़्बा जाग जाता है, ‘कुन फ़ाया कुन’ को सुनकर हम सूफ़ी रंग में रंग जाते हैं, ‘कहने को जश्ने बहारा’ में दो नाराज़ प्रेमियों के बीच प्यार की तलाश है और ‘ऐ अजनबी’ में प्यार की कसक.

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अगर आपने उनके गाने और संगीत को सुना है, तो आप भी यही कहेंगे कि ए. आर. रहमान जैसा कोई नहीं. ख़ैर, संगीत की दुनिया के इस बेताज बादशाह से जुड़ा एक दिलचस्प क़िस्सा आज हम आपके लिए लेकर आए हैं. इसमें हम बताएंगे कि कैसे उन्हें एक हिंदी भाषी डायरेक्टर के साथ काम करने का मौक़ा मिला था और ये फ़िल्म कौन सी थी?

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ए. आर. रहमान वैसे तो 1992 में आई रोज़ा से बॉलीवुड में कदम रख दिया था, लेकिन एक हिंदी भाषी डायरेक्टर के साथ ये उनकी पहली फ़िल्म नहीं थी. इसके डायरेक्टर मणिरत्नम मूलत: हिंदी लैंग्वेज के डायरेक्टर नहीं हैं.

गोविंद निहलानी वो पहले हिंदी भाषी फ़िल्म मेकर थे, जिन्होंने ए. आर. रहमान को पहली बार अपनी फ़िल्म के लिए साइन किया था. फ़िल्म का नाम था तक्षक. 1992 में आई इस फ़िल्म में तबू और अजय देवगन लीड रोल में थे. फ़िल्म का गाना मुझे रंग दे उस वक़्त ख़ूब फ़ेमस हुआ था.

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इस फ़िल्म के लिए ए. आर. रहमान को कैसे सेलेक्ट किया गया था इसकी भी एक इंटरेस्टिंग स्टोरी है. दरअसल, गोविंद के एक दोस्त ने उन दिनों उन्हें एक कैसेट सुनने को दी थी, ये कैसेट थी फ़िल्म रोज़ा की, जिसका संगीत ए. आर. रहमान ने दिया था. इस कैसेट को सुनते समय गोविंद इसके गाने चिन्ना-चिन्ना आसाई पर अटक गए. ये गाना उन्हें इतना सुकून दे रहा था कि उन्होंने इसे कई बार सुना. तभी उन्होंने तय कर लिया था कि फ़िल्म के म्यूज़िक डायरेक्टर के साथ वो काम करेंगे.

रहमान के बारे में थोड़ी खोज ख़बर करने के बाद गोविंद उनसे मिलने में कामयाब रहे. पहली मुलाकात में ही उन्होंने रहमान को तक्षक का म्यूज़िक डायरेक्टर बनने का ऑफ़र दे दिया था. इस तरह ए. आर. रहमान को तक्षक फ़िल्म में काम करने का मौक़ा मिला. इस फ़िल्म का संगीत काफ़ी अच्छा था और इसका गाना 'मुझे रंग दे', तो आज भी लोगों का फ़ेवरेट सॉन्ग बना हुआ है.

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अब जब बात 'तक्षक' के इस सुपरहिट गाने की चल ही रही है, तो चलते-चलते इस गाने से जुड़ा एक इंटरेस्टिंग फ़ैक्ट भी आपको बता देते हैं. इस गाने को गाया था आशा भोसले ने पर इसके बोल लिखे थे सुखविंदर सिंह ने, जो ख़ुद एक आला दर्जे के गायक हैं. इसे लिखने का ऑफ़र ए.आर. रहमान ने ही सुखविंदर को दिया था. इस गाने को आप यहां सुन सकते हैं:

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