‘रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं नाम है शहंशाह’ 

ये डायलॉग अमिताभ बच्चन और 'शहंशाह' (Shahenshah) फ़िल्म के पर्याय बन चुके हैं. इस कथन को साबित किया था फ़िल्म के डायरेक्टर टीनू आनंद के पिता इंदर राज आनंद ने. उन्होंने अपने अंतिम दिनों में इस फ़िल्म का क्लाइमेक्स लिख बेटे को तोहफ़ा दिया था. साथ ही में ये कहा था कि वो कभी सबके सामने टीनू आनंद का सिर नहीं झुकने देंगे.

Shahenshah (1988 film)
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इस फ़िल्म से जुड़ी ये दिलचस्प बात ख़ुद इसके डायरेक्टर टीनू आनंद (Tinnu Anand) ने लोगों के साथ शेयर की थी. चलिए आपको भी बताते हैं..

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टीनू आनंद के पिता बीमार पड़ गए थे

Shahenshah  film
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बात उन दिनों की है जब टीनू आनंद इस फ़िल्म का निर्देशन कर रहे थे. कास्टिंग हो चुकी थी और शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी. फ़िल्म में शहंशाह का रोल अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) ने प्ले किया और साथ में मीनाक्षी शेषाद्री, प्राण, कादर ख़ान, अमरीश पुरी और प्रेम चोपड़ा जैसे कलाकार भी थे. शूटिंग अपने अंतिम पड़ाव पर थी कि अचानक टीनू आनंद के पिता बीमार पड़ गए.   

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बेटे की चिंता को समझ गया पिता  

Shahenshah
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वो उन्हें अस्पताल में मिलने गए. एक तरफ पिता की देखभाल करना और एक तरफ फ़िल्म को पूरा करना दोनों की चिंता में वो डूबे रहते थे. ऊपर से फ़िल्म का क्लाइमेक्स भी पूरा नहीं था, जिसे उनके पिता को ही लिखना था. एक दिन अस्पताल में बेटे के चेहरे पर तनाव देख वो समझ गए कि इसे फ़िल्म के अंत की चिंता है, जो अभी तक अधूरा है.   

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बेटे को कहा निराश नहीं करेंगे उनको  

Shahenshah 1988
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तब उन्होंने टीनू आनंद को बिस्तर पर लेटे हुए इशारे से अपने पास बुलाया और ऑक्सीजन मास्क हटाकर कहा कि बेटे तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें बीच में नहीं छोड़ूंगा. मैं लोगों को ये कहने का मौक़ा नहीं दूंगा कि एक बाप ने पूरा क्लाइमैक्स न लिख कर बेटे को बीच मझधार में छोड़ दिया.

'शहंशाह' के असली राइटर ये थे  

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टीनू आनंद कहते हैं- 'आपको विश्वास नहीं होगा अपनी मृत्यु के आख़िरी दिन वो मेरे असिस्टेंट के साथ बैठे और 23 पन्नों का पूरा क्लाइमैक्स लिख डाला डायलॉग्स के साथ.' आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप गूगल करेंगे तो आपको फ़िल्म के राइटर के नाम पर जया बच्चन लिखा दिखेगा, लेकिन असलियत में इंदर राज आनंद ने इसे लिखा था. 

tinu anand
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टीनू आनंद ने खु़ुद ये बात कही थी कि ये झूठ है, असल में कहानी उनके पिता ने लिखी थी और उन्होंने ख़ुद ही ये जया को दे दी थी. ऐसा उन्होंने क्यों किया, इसका कारण उन्होंने बताने से इंकार कर दिया था. 

'शहंशाह' की कहानी पूरी लिख कर एक पिता ने सच में अपने बेटे को ख़ूबसूरत अंतिम तोहफ़ा दिया था.