तमाम चुनौतियों और विरोध के बाद पीएम नरेंद्र मोदी आ गए, सत्ता में भी और सिनेमा घर में भी. हालांकि सत्ता में जैसा बंपर में स्वागत हुआ, वैसा कुछ थियेटर में देखने को नहीं मिला.

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अधिकांश शुरुआती प्रतिक्रियाएं फ़िल्म के लिए नकारात्मक ही रहीं. फ़िल्म समीक्षकों को ये फ़िल्म कुछ ख़ास नहीं भाई और दर्शकों ने भी मिली-जुली प्रतिक्रिया ही दी.

Times of India ने इस फ़िल्म को बायोग्राफ़ी से ज़्यादा एक प्रॉपोगैंडा फ़िल्म बताया है और उसे 5 से 2.5 स्टार दिया है. The Indian Express ने अपनी समीक्षा में लिखा है कि पीएम नरेंद्र मोदी में विवेक ओबराय की कास्टिंग ग़लत कर दी गई है और इसमें विवादित हिस्स नहीं रखे गए हैं, दिए हैं 5 से 2 स्टार.

जनता की प्रतिक्रिया ट्विटर पर देखी जा सकती है.

बता दें कि ये फ़िल्म चुनाव से पहले लगभग 40 दिन के भीतर पूरी तरह से बन कर तैयार हो गई थी लेकिन चुनाव आयोग ने इसकी रिलीज़ पर रोक लगा दी.