Junior Mehmood: हिंदी सिनेमा में 60, 70, 80 और 90 के दशक से लेकर आज तक जूनियर महमूद का नाम छोटा हो या बड़ा पर्दा निरंतर चल ही रहा है. इन्होंने 60 और 70 के दशक में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर अपना फ़िल्मी सफ़र शुरू किया और उनकी गाड़ी जो चली तो फिर उसका पेट्रोल ख़त्म ही नहीं हुआ. जूनियर महमूद (Junior Mehmood) ने उस दौर के लगभग हर बॉलीवुड स्टार (Bollywood Star) के साथ काम किया था और छोटी सी उम्र में ही अपना नाम बना लिया था. हालांकि, हम सब उन्हें जूनियर महमूद के नाम से जानते हैं, लेकिन उनका असली नाम मोहम्मद नईम है. भले ही आज उनका असली नाम हमें न पता हो, लेकिन उनका रील नेम जूनियर महमूद सबको पता है और इसी नाम से उन्होंने इतनी शौहरत कमाई कि मुंबई में उस दौर में केवल 10 या 12 इंपाला कार हुआ करती थीं, जिनमें से एक जूनियर महमूद (Junior Mehmood) के पास थी.

चलिए जानते हैं, उस दौर का इतना फ़ेमस सितारा आज कहां है और क्या कर रहा है?

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कैसे मिला फ़िल्मों में ब्रेक?

जूनियर महमूद यानि मोहम्मद नईम सैय्यद का जन्म 15 नवंबर 1956 को मुंबई में हुआ था. इनके पिता इंडियन रेलवे में इंजन ड्राइवर का काम करते थे और ये एंटोप हिल इलाक़े में स्थित रेलवे कॉलोनी में रहते थे. जूनियर महमूद (Junior Mehmood) चार भाई और दो बहनें थे. इनके एक भाई फ़िल्म सेट पर स्टिल फ़ोटोग्राफ़र के तौर पर काम करते थे, उन्हीं फ़िल्मी सेट की कहानियां सुन-सुन कर वो फ़िल्मों की तरफ़ आकर्षित होने लगे.

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ऐसे ही एक दिन कुछ न बोलने के वादे के साथ जूनियर महमूद (Junior Mehmood) अपने भाई के साथ शूटिंग पर गए. वो शूटिंग 'कितना नाज़ुक है दिल' फ़िल्म की थी, जिसमें महान कॉमेडियन जॉनी वॉकर थे, तभी जो बच्चा इनके साथ शूटिंग कर रहा था, वो अपनी लाइनें बार-बार भूल रहा था, वहीं डायरेक्टर की कुर्सी के पीछे खड़े जूनियर महूद बोले कि इतनी सी लाइन नहीं बोल पा रहा है और आ गया एक्टिंग करने. तभी डायरेक्टर ने इनसे पूछा कि तुम ये लाइंस बोल सकते हो तो उन्होंने कहा कि मैं तो जॉनी वॉकर की लाइंस भी बोल सकता हूं. उस वक़्त इनकी उम्र 9 साल थी, और इसी फ़िल्म से उनका डेब्यू हो गया.

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कैसे पड़ा जूनियर महमूद नाम (junior Mehmood)?

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इस नाम के पीछे की कहानी दिग्गज कॉमेडियन महमूद साहब से जुड़ी है, दरअसल, एक बार महमूद साहब की बेटी का जन्मदिन था और उन्होंने नईम को नहीं बुलाया तो उन्होंने कहा कि मैं छोटा आर्टिस्ट हूं इसीलिए आपने मुझे नहीं बुलाया, ऐसा कहने पर उन्होंने नईम को पार्टी में बुला लिया और उन्होंने उस पार्टी में महमूद साहब के गाने 'हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं' पर ऐसा डांस किया कि ख़ुद महमूद साहब ने उन्हें अपना चेला बनाया और जूनियर महमूद नाम दे दिया. नईम ने अपने गुरू को गुरू दक्षिणा के रूप में साढ़े पांच रुपये दिए और उनके चेले बन गए.

ब्रह्मचारी बनी टर्निंग पॉइंट

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जूनियर महमूद (Junior Mehmood) नाम मिलने के बाद इनकी क़िस्मत की चाभी खुल गई और इन्होंने ब्रह्मचारी फ़िल्म में काम किया. बस यहीं से इनकी एक्टिंग की गाड़ी चल पड़ी. इसके बाद, इन्होंने दो रास्ते, आन मिलो सजना, कटी पतंग, हाथी मेरे साथी और कारवां जैसी बड़ी और सुपरहिट फ़िल्में की. इनकी ज़्यादातर फ़िल्में सिल्वर जुबली रही थीं. हालांकि, इतना सक्सेज़फ़ुल करयिर देखने के बाद धीरे-धीरे उनका स्टारडम ख़त्म होने लगा. इसके बाद इन्होंने गीत गाता चल, दीवानग़ी और अंखियों के झरोखे से जैसी फ़िल्मों में काम तो किया इन्हें सफलता भी मिली लेकिन इनका स्टारडम पूरी तरह से ख़त्म हो गया.

सीरियल में किया काम

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फ़िल्मों में सफ़लता हाथ लगने के बाद जूनियर महमूद ने टीवी सीरियल्स में काम किया, जिनमें 'प्यार का दर्द मीठा-मीठा प्यारा-प्यारा', 'एक रिश्ता साझेदारी का' और 'तेनाली रामा' शामिल हैं. इन्हें आख़िरी बार सब टीवी पर आने वाले इसी शो तेनाली रामा में देखा गया था.

इसी फ़िल्मी पर्दे पर अपनी एक्टिंग से जूनियर महमूद ने करोड़ों लोगों को हंसाया है आज इसी सितारे को गुमनामी में जीना पड़ रहा है.