होली, ईद, दिवाली और क्रिसमस जैसे त्यौहारों पर बॉलीवुड में फ़िल्में रिलीज़ करने की होड़ सी लगी रहती है. फ़ेस्टिव सीजन को मुनाफ़े में तब्दील करने लिए फ़िल्म मेकर्स तैयार रहते हैं, ख़ासकर दिवाली के मौके पर. मगर ढोलीवुड यानी गुजराती फ़िल्म इंडस्ट्री में इसका उल्टा होता है. वहां पर दिवाली पर कोई भी गुजराती फ़िल्म रिलीज़ नहीं होती. ऐसा क्यों होता है? इसकी भी एक ख़ास वजह है.

reward4188

ढोलीवुड की बात करें तो नवंबर में कई गुजराती फ़िल्में रिलीज़ होंगी, जैसे हेलारो, गुजरात 11, दिया द वंडर गर्ल आदि. पर इनमें से कोई भी फ़िल्म दिवाली या फिर उसके आस-पास नहीं रिलीज़ होगी.

twitter

दरअसल, त्यौहारों के मौके पर गुजराती लोग अपनों के साथ वक़्त बिताना पसंद करते हैं. नवरात्रि, दिवाली आदि को वो अपने परिवार के साथ इंजॉय करना चाहते हैं. इसलिए वहां पर बड़े त्यौहारों पर गुजराती फ़िल्म मेकर्स अपनी फ़िल्म रिलीज़ करने से कतराते हैं.

indiatoday

इसकी दूसरी वजह है बॉलीवुड. चूकीं दिवाली पर बहुत सी बड़े सितारों और बड़े बजट की फ़िल्में रिलीज़ होती हैं. ऐसे में गुजराती फ़िल्मों को न तो बेस्ट शो टाइमिंग मिल पाती है, न ही जायज स्क्रीन्स. इसलिए ढोलीवुड बॉक्स ऑफ़िस पर बॉलीवुड फ़िल्मों से टक्कर लेने का रिस्क नहीं लेता.

cinetalkers

जानकारों का कहना है कि किसी भी गुजराती फ़िल्म को हिट होने के या फिर ठीक-ठाक कमाई करने के लिए क़रीब 10 दिनों तक थिएटर में लगे रहना होता है. बॉलीवुड के सामने बहुत कम ही फ़िल्में टिक पाती हैं. इसलिए डिस्ट्रीब्यूटर गुजराती फ़िल्मों को त्यौहारों के बाद ही रिलीज़ करते हैं. 

moneycontrol

ढोलीवुड और दिवाली से जुड़े इस कनेक्शन के बारे में आपको पहले पता था?

Entertainment के और आर्टिकल पढ़ने के लिये ScoopWhoop Hindi पर क्लिक करें.