हिंदी सिनेमा के लेजेंडरी एक्टर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर गुरु दत्त (Guru Dutt) को उनकी कल्ट फिल्मों के लिए जाना जाता है. गुरु दत्त ने अपने करियर में कई शानदार फ़िल्मों में काम किया. इनमें ‘भरोसा’, ‘साहिब बीवी और गुलाम’, ‘चौदहवीं का चांद’, ‘कागज़ के फूल’, ‘प्यासा’, 'सीआईडी' जैसी फ़िल्मो के नाम शामिल हैं. 

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गुरु दत्त को दुनिया चाहती थी. उनकी एक्टिंग से लोग प्यार करते थे. मगर कोई नहीं जानता था कि ये एक्टर ख़ुद को ही शायद प्यार नहीं करता. वो डिप्रेशन के शिकार थे. वो इस कदर अपनी ज़िंदगी से नाराज़ चल रहे थे कि दो बार उन्होंने सुसाइड करने की कोशिश भी की, मगर बच गए. एक वक़्त तो ऐसा आया कि उन्होंने ख़ुद अपने ही आलीशान बंगले को गिरवा दिया था. 

क्यों नाराज़ थे अपनी ज़िंदगी से गुरुदत्त?

कहते हैं कि गुरुदत्त डिप्रेशन में थे. उन्हें नींद नहीं आती थी. सोने के लिए वो नींद की गोलियां लेते थे, और उसके बुरी तरह आदी हो चुके थे. दरअसल, उनकी पर्सनल लाइफ़ में काफ़ी उथल-पुथल चल रही थी. गीता दत्त से उनकी शादी हो चुकी थी, मगर उसके बाद उनकी ज़िंदगी में वहीदा रहमान आ गईं. इस वजह से गीता और उनके बीच अनबन हो गई.

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मगर जब वहीदा रहमान से उनका रिश्ता नहीं चल पाया, तो वो पूरी तरह टूट गए. पत्नी गीता से उनका झगड़ा चलता ही रहता था. एक बार उनके दोस्त ने उनसे पूछा था कि तुम सुसाइड क्यों करना चाहते हो? तब गुरुदत्त ने कहा था कि वो अपनी ज़िंदगी से नहीं, बल्कि ख़ुद और ख़ुद में अंसतुष्ट हैं. उन्हें बस एक ऐसा कोना चाहिए, जहां उन्हें शांति मिल सके. फिर उनकी ज़िंदगी जीने लायक हो जाएगी. 

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आख़िर क्यों गिरवा दिया अपना आलीशान बंगला?

बंबई के पॉश इलाके पाली हिल में गुरुदत्त का आलीशान बंगला था. दुनिया के लिए ये बंगला सपनों के महल जैसा था, मगर गुरुदत्त के लिए नहीं. वजह थी कि उनकी पत्नी गीता को ये बंगला भूतिया लगता था. गीता को लगता था कि बंंगले में एक पेड़ है, जिस पर भूत रहता है. इतना ही नहीं, उनका कहना था कि इसी बंगले की वजह से उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में परेशानियां आ रही हैं.

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इस बीच साल 1963 में वो दिन आया, जब गुरुदत्त का जन्मदिन था. तारीख़ थी 9 जुलाई. दुनिया भले ही अपने बर्थडे का जश्न मनाती हो, मगर गुरुदत्त इस दिन को अपनी याददाश्त से हमेशा के लिए मिटाना चाहते थे. इसी दिन उन्होंने कुछ मज़दूरों को बुलाया और उसने कहा कि इस बंगले को गिरा दो. उन्होंने कहा और मज़दूरों ने कर दिया. मगर कोई समझ नहीं पाया कि आख़िर इस एक्टर ने ऐसा क्यों किया?

फिर एक दिन गुरुदत्त, राइटर बिमल मित्र को उसी टूट चुके बंंगले पर लेकर जाते हैं. जब बिमल उनसे पूछते हैं कि उन्होंने ये बंंगला क्यों गिरवा दिया, तो उन्होंने कहा, ‘गीता की वजह से.’ आगे उन्होंने कहा, ‘घर न होने की तकलीफ से, घर होने की तकलीफ और भयंकर होती है दोस्त'