मनोज बाजपेयी और अनुराग कश्यप ने पहली बार फ़िल्म 'सत्या' में एक साथ काम किया था. मनोज ने इस मूवी में भीकू म्हात्रे का रोल किया था और अनुराग कश्यप ने इसकी कहानी लिखी थी. इसके बाद दोनों में गहरी मित्रता हो गई. इसके कई सालों बाद दोनों ने फ़िल्म 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' में काम किया था.

इस बीच दोनों की दोस्ती में दरार आ गई थी और दोनों ने एक दूसरे से बात करना बंद कर दिया था. ऐसा क्यों और कब हुआ चलिए आज आपको बता देते हैं.

manoj bajpai and anurag kashyap
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1998 में रिलीज हुई फ़िल्म 'सत्या' के बाद अनुराग कश्यप और मनोज बाजपेयी ने साथ में दो फ़िल्मों में काम किया था. 'कौन' और 'शूल'. मगर इन दोनों फ़िल्मों के बाद वो सीधे 2012 में रिलीज़ हुई फ़िल्म 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' में साथ काम करते दिखे. 11 साल तक उन्होंने एक दूसरे से बात नहीं की. इसकी क्या वजह थी मनोज ने ख़ुद अपने एक इंटरव्यू में बताया है.

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उन्होंने कहा- 'अनुराग कान का कच्चा है. कभी इस गली चलता है, कभी उस गली. कोई उसे कह दे कि मनोज ने ऐसा बोला तो मान लेगा है. एक बार किसी ने ऐसे ही मेरे खिलाफ़ भड़का दिया. उसे लगा मैं उसका दोस्त नहीं हूं. तो मुझसे बातचीत बंद कर दी.'

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फिर मनोज बाजपेयी ने भी उनसे बात करना बंद कर दिया. इसके बाद 10-11 सालों तक दोनों में कभी बात नहीं हुई. फिर एक दिन मनोज ने ही ख़ुद फ़ोन कर उनसे बात की. ये वो दौर था जब मनोज बाजपेयी के पास काम नहीं था और वो खाली वक़्त में अच्छी फ़िल्में देखते थे. मनोज ने अनुराग कश्यप की फ़िल्म 'देव डी' देखी. उन्हें ये फ़िल्म अच्छी लगी और अनुराग को बधाई देने के लिए फ़ोन घुमा दिया और कहा कि ऐसे ही तरक्की करते रहो. 

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इस वाकये के क़रीब 2 साल बाद मनोज को अनुराग का फ़ोन आया. मनोज बाजपेयी ने फ़ोन उठाया तो अनुराग ने कहा- 'एक स्क्रिप्ट है सुनोगे, मेरे साथ काम करोगे'? फिर फ़िल्म की स्क्रिप्ट सुनने के लिए एक-दो दिन में ऑफ़िस आने को कहा. मनोज बाजपेयी रात को ही उनके ऑफ़िस पहुंच गए. दोनों गले मिले और फ़िल्म की कहानी सुनी. रात 12:30 तक दोनों फ़िल्म की स्क्रिप्ट पर बात करते रहे. इसके बाद दोनों ने साथ खाना खाया और अपने-अपने घर चले गए.

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इस तरह एक बार फिर से दोनों में दोस्ती हो गई. वो जिस फ़िल्म की स्क्रिप्ट के बारे में बात कर रहे थे वो 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर' थी. इन दोनों से जुड़ा ये क़िस्सा आप यहां सुन सकते हैं. 


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