दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल पर धोख़ाधड़ी का आरोप लगा है. यूरोपीय यूनियन आयोग ने गूगल पर करीब 2.1 बिलियन पाउंड का जुर्माना लगाया है. ये जुर्माना सर्च रिज़ल्ट्स में गड़बड़ी करने को लेकर लगाया गया है. आयोग के मुताबिक, गूगल ने अपनी शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल करते हुए, सर्च इंज़न में अपनी शॉपिंग सेवा का अधिक प्रचार किया.

किसी भी कंपनी पर लगाया गया, ये अबतक का सबसे बड़ा जुर्माना है. मामले की जांच 2010 में शुरू हुई थी. दरअसल, इस मामले ने तूल तब पकड़ा, जब अन्य प्राइज़-कंपैरिज़न वेबसाइट्स ने शिकायत करते हुए कहा कि गूगल ने अपने सर्च रिज़ल्ट से उनकी सेवाएं हटा दी हैं. आयोग ने गूगल को सख़्त कार्यवाही और ज़ुर्माने के चेतावनी देते हुए, अपनी प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियां 90 दिनों में न बंद करने की हिदायत दी है.

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पूरे मामले पर गूगल ने कहा है कि 'वो अपने ख़िलाफ़ आरोपों की सुनवाई के लिए तैयार है. वो अदालत में अपना बचाव करेगा.'

EU की कंपटीशन कमिश्नर Margrethe Vestager ने कहा, 'गूगल ने जो किया है, नियमों के अनुसार वो पूरी तरह से अवैध है. गूगल ने दूसरी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा और नए एक्सपेरीमेंट करने के मौके नहीं दिए. यहां तक कि उसने यूरोपीय उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धा के लाभ और असली चॉइस से भी वंचित रखा.'

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आयोग ने पाया कि गूगल ने अपने सिस्टम में ऐसा तकनीकी हेरफेर किया है, जिससे सर्च रिज़ल्ट्स में उसकी शॉपिंग सर्विस ही दिखती है. वहीं, दूसरी तरफ़ प्रतिद्वंद्वी साइटों को हतोत्साहित किया जा रहा है.

दरअसल, गूगल का यूरोप में इंटरनेट सर्च पर 90 प्रतिशत का शेयर है. अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों पर गूगल का कहना है, 'हम आयोग के फ़ैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके दावों से अहसमत हैं. हम अपील पर विचार कर रहे हैं, इसलिए आयोग के फ़ैसले की गहराई से समीक्षा करेंगे.'

क्या है मसला

दरअसल यूज़र्स को सर्च, जीमेल, हैंगआउट, प्ले जैसी सेवाएं देकर, गूगल हर दिन 800 करोड़ रुपए कमा लेता है और ये कमाई उसे विज्ञापनों के जरिए होती है. जब भी कोई यूज़र गूगल पर कुछ भी सर्च करता है, तो उससे जुड़े विज्ञापन अपने आप सर्च पेज पर आने लगते हैं.

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