'जहां चाह, वहां राह.'

ज़िंदगी एक इम्तेहान है और उस इम्तेहान से हर किसी को गुज़रना पड़ता है. फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि उस इम्तेहान को आपने कितनी शिद्दत से दिया है. कुछ लोग अपनी इच्छा शक्ति और दृढ़ सकंलप से असंभव चीज़ को भी संभव बनाकर, दूसरों के लिए मिसाल बन जाते हैं.

ऐसे ही लोगों में शुमार हैं पप्पू सिंह. 17 साल भारतीय सेना में सेवा दी, दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया. पिस्टल शूटिंग में भी नेशनल चैंपियन रहे और अब पैरा वॉलीबाल में राजस्थान टीम के कप्तान बनकर, दिव्यांगों को प्रेरित कर रहे हैं, पप्पू सिंह. ये रिटायर्ड आर्मी जवान, हर लम्हे को पूरे जोश और ख़ुशी के साथ जीता है. इतना ही नहीं, पप्पू सिंह ने ज़िंदगी से हताश और निराश दिव्यांगो को भी आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया है.

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रिटायर्ड आर्मी जवान मूल रूप से जयपुर का रहना वाला है. पप्पू सिंह ने साल 2007 में एक ट्रेन हादसे में अपना बायां पैर खो दिया था. पप्पू सिंह अपने एक पैर से दो पैरों पर दौड़ने वाले, खिलाड़ियों को कुछ पलों में मात देने में माहिर हैं. इस शख़्स के लिए उसका एक पैर न होना कमज़ोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत है.

'The Divya Khel Pratishthan Festival' में पप्पू सिंह ने राजस्थान पैरा वॉलीबाल टीम का प्रतिनिधत्व कर, वहां मौजूद तमाम लोगों का दिल जीत लिया. बातचीत के दौरान पप्पू सिंह ने बताया, ' मैं 1985 से मैच खेल रहे हूं. दुर्घटना से पहले मैं दो बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरा वॉलीबाल का प्रतिनिधत्व कर चुका हूं. वर्ष 1988 में फौज़ ज्वाइन किया और इस बीच 2002 व 2003 में 45 देशों की प्रतिस्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व किया.'

पप्पू आगे कहते हैं कि 'पिस्टल शूटिंग, एथलेटिक्स, स्वीमिंग, ताइक्वांडो, बैडमिंटन और पावर लिफ्टिंग जैसे कई इवेंट हैं, जिनमें भाग लेकर दिव्यांग अपने आपको साबित कर सकते हैं. बस उन्हें ये पता होना चाहिए कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं. हम सबके अंदर एक हुनर छिपा है, बस इससे पहचानने की ज़रूरत है.' पप्पू सिंह को बिहार के पूर्व मुख़्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से ईनाम भी मिल चुका है.

वाकई पप्पू आप उन तमाम लोगों के लिए, प्रेरणा हैं, जो पल-पल अपनी अच्छी ख़ासी ज़िंदगी को कोसते रहते हैं, किसी ने सच ही कहा है, काबिल बनो, कामयाबी ख़ुद मिल जाएगी.

Source : topyaps