आपने कुछ दिनों पहले ये ख़बर पढ़ी होगी:

नासिक के किसान संजय साठे को 750 किलो प्याज़ बेचने पर केवल 1000 हज़ार रुपये मिले और संजय साठे ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए उन पैसों को प्रधानमंत्री राहत कोष में मनी आॉर्डर द्वारा भेज दिया. इस हिस्से तक ख़बर के सभी तथ्य सही हैं.

इसके बाद दूसरा हिस्सा ख़बर के साथ जुड़ गया, जिसमें कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने किसान द्वारा भेजे गए पैसों को वापस भेज दिया है और संजय साठे को उन पैसों को ऑनलाइन भेजने के लिए कहा है. ख़बर के ये हिस्सा ग़लत/ Fake है.

यानी, संजय साठे ने विरोध स्वरूप पैसे भेजे, प्रधानमंत्री कार्यालय ने उसे स्वीकार नहीं किया लेकिन ऑनलाइन तरीके से भेजने की मांग भी नहीं की.

कई मीडिया संस्थान इस ग़लत ख़बर के झांसे में आ गए. ScoopWhoop Hindi ने भी प्रमाणिक माने जाने वाली मीडिया संस्थानों के स्रोत पर भरोसा कर फ़ेसबुक पोस्ट अपलोड की. हम अपनी भूल पर ख़ेद प्रकट करते हैं.

आपको बता दें कि संजय साठे ने चार महीने की मेहनत के बाद 750 किलो प्याज़ उगाया था, जिसकी मंडी में हज़ार रुपये कीमत लगाई गई. साठे ने अपनी ओर से कुछ पैसे मिला कर एक नोट के साथ उसे प्रधानंत्री आपदा राहत कोष में भेज दिया.

नोट में लिखा था, 'मैं किसी राजनैतिक पार्टी से सम्बंध नहीं रखता, लेकिन मैं किसानों के दुख के प्रति सरकार के रवैये से गुस्सा हूं.'