रेडियो पर सुनाई और टीवी पर दिखाई देने वाले कई विज्ञापन ऐसे होते हैं, जिनकी पंचलाइन हमारे दिल-ओ-दिमाग पर कुछ ऐसी चढ़ जाती है कि हम वक़्त-बेवक़्त उसे ही गुनगुनाने लगाते हैं.

अब जैसे आपको कोल्ड ड्रिंक का वो वाला एड, तो याद ही होगा, जिसमें आमिर खान 'ठंडा मतलब, कोका कोला' बोल कर लोगों को समझाने की कोशिश करते हैं. ये छोटी-छोटी लाइने सुनने में जितनी आकर्षक लगती हैं. उतनी ही प्रभावशाली होती है कि उपभोक्ता के दिमाग पर अपनी छाप छोड़ते हैं.

आज हम आपके लिए इन्हीं प्रभावशाली लाइन्स को लिखने वाले उन लोगों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने कागज़ पर लिखे शब्दों के ज़रिये एक आम से ब्रांड को ख़ास बना दिया.

नीमा नामचू

विज्ञापन की दुनिया में नीमा नामचू एक ऐसा नाम है, जिसने दार्जलिंग के ऑफ़िस में बैठे-बैठे राहुल द्रविड को पूरी दुनिया में 'The Wall' के नाम से प्रसिद्ध कर दिया.

सतबीर सिंह

'बजाते रहो' लाइन को सुन कर मन में तुरंत से ख़्याल आ जाता है कि ये Red FM की बात हो रही है. दो शब्दों में Red FM की थीम को निखारने के पीछे सतबीर सिंह का हाथ है, जो Incredible India! जैसे कैंपेन के साथ काम कर चुके हैं.

आशीष खजांची

टाटा स्काई के ज़्यादातर विज्ञापनों में इस्तेमाल होने वाली लाइन 'इसको लगा डाला, तो लाइफ़ झिंगालाला' आशीष खजांची की कलम से निकली थी.

पियूष पांडे

विज्ञापन की दुनिया में क्रिएटिविटी के बादशाह कहे जाने वाले पियूष पांडे वही शख़्स हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनावों के दौरान 'अब की बार, मोदी सरकार' का नारा दिया था. इससे पहले भी पियूष 'फ़ेविकोल का मज़बूत जोड़' जैसे एड कैम्पेन लिख चुके हैं.

प्रसून जोशी

कुछ सालों से प्रसून एक गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाये हुए हैं, पर गीत लिखने से पहले प्रसून भी कई विज्ञापन लिख चुके हैं. प्रसून की कलम से ही 'ठंडा मतलब कोका-कोला' जैसी लाइनें निकली हैं.

रमेश श्रीवत्स

ऐसा नहीं कि शब्दों के जाल से सिर्फ़ विज्ञापन को सजाया जाता है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इन शब्दों की ताक़त को साफ़ देखा जा सकता है. अब जैसे साइना नेहवाल की वो सीरीज़ ही याद कीजिये, जिसमें उनका मुकाबला चाइनीज़ खिलाड़ी से होना था. 'साइना Vs चाइना' नाम से ये कैम्पेन इतना हिट हुआ था कि रातों-रात इसने सभी तरह के रिकॉर्ड तोड़ दिए. सिर्फ़ दो शब्द के ज़रिए लोगों में साइना के लिए प्यार भरने के पीछे रमेश श्रीवत्स का हाथ था.