भारत के इतिहास में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एक अनोखी मिसाल है. देश को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद कराने के लिए उस समय सभी वर्गों के लोगों ने सभी प्रकार की जाति,पंथ या धर्म से ऊपर उठकर और एकजुट होकर इस महान उद्देश्य के लिए काम किया. धरती मां को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए हर वर्ग के व्यक्ति ने बिना अपने प्राणों की परवाह किये आज़ादी की अलख जलाई. उन्होंने हंसते-हंसते अपने प्राणों को बलिदान कर दिया. यह लोगों की विभिन्न पीढ़ियों का संघर्ष और बलिदान था, जिसके परिणामस्वरुप स्वतंत्रता प्राप्त हुई और राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ. भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नारों की विशेष भूमिका है. स्वतंत्रता के लिए बोले गए हर नारे ने भारतीय क्रांतिकारियों में जान फूंक दी कि हर 'नारा अंग्रेजों के ताबूत में आखिरी कील' साबित हुआ.

इसीलिए आज हम भारतीय स्वतंत्रता की 73वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मशहूर सेनानियों के कुछ नारे लेकर आए हैं.

लेकिन जिस देश को आज़ाद कराने के लिए हज़ारों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी, उसी देश में आज लोग स्वार्थ, भष्टाचार, बेरोज़गारी, महंगाई, रिश्वतखोरी, दहेज आदि बुराइयों की गुलामी कर रहे हैं. अगर हमें अपने देश को दोबारा गुलामी की जंज़ीरों में जकड़ा हुआ नहीं देखना है, तो इन सब बुराइयों को अपने समाज से उखाड़ फेंकना होगा.

तो चलिए आज स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर प्रण लेते हैं कि हम अपने आस-पास से इस तरह की बुराइयों को दूर हटाने के प्रयास शुरू करेंगे. अगर आप मेरी इस बात सहमत हैं तो शेयर और लाइक करें.

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