अक्टूबर 2018 में रिलीज़ हुई फ़िल्म अंधाधुन इंडियन सिनेमा की अब तक की बेहतरीन और उम्दा फ़िल्मों में से एक है. ये एक सस्पेंस थ्रिलर है और दर्शकों को थ्रिलर के साथ हर सेकंड एक नए सस्पेंस में डालने में भी सफ़ल रही.

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फ़िल्म के लिए ये बात कहना बिलकुल भी ग़लत नहीं होगा कि बॉलीवुड में ऐसी फ़िल्में न के बराबर ही बनी होंगी. शुरुआत से लेकर आख़िरी सीन तक बिना पलकें झपकाए आप अपनी जगह पर ही बैठे रहेंगे. फ़िल्म के निर्देशक श्रीराम राघवन ने इसकी कहानी को इस तरह से परदे पर उतारा है कि अगले सेकंड में क्या होने वाला है आप उनकी कल्पना भी नहीं कर पाएंगे.

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अंधाधुन वो मूवी है, जो ख़त्म होने के कई घंटों बाद तक दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है. वैसे तो आपने अक्सर मूवीज़, वेब सीरीज़ और वेब शोज़ पर फ़ैन्स के रिव्यूज़, ओपिनियन और फ़ैन थ्योरीज़ पढ़े और सुने होंगे, लेकिन ये पहली बार हुआ है, जब लोग किसी हिंदी फ़िल्म को देखकर इतने एक्साइटेड हो गए हैं, कि वो फ़िल्म के थ्रिलर और सस्पेंस से जुड़ी अपनी ख़ुद की थ्योरीज़ लेकर आ रहे हैं.

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ऐसी ही एक इंटरेस्टिंग थ्योरी आपके सामने पेश कर रहे हैं, जिसे जानने के बाद आपका दिमाग़ भी फट के फिलावर हो जाएगा और आप भी अपना सिर खुजाने पर मजबूर हो जाएंगे. इससे पहले हम आपको इस बारे में बताएं अगर आपने ये फ़िल्म अभी तक नहीं देखी है, तो आपका अब ये ये फ़िल्म देखना बेकार हो जाएगा, क्योंकि यहां इसका सारा सस्पेंस और थ्रिल खुल जाएगा.

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अब आते हैं इस थ्योरी पर जिसके अनुसार, फ़िल्म के प्लॉट का स्ट्रॉन्ग कनेक्शन बिल्ली से है. इसका सबूत है फ़िल्म का पोस्टर जिसमें आयुष्मान खुराना के साथ राधिका आप्टे या तब्बू नहीं, बल्कि बिल्ली को सड़क क्रॉस करते हुए दिखाया गया है.

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फ़ेसबुक यूज़र, Sulagna Chatterjee ने एक पोस्ट में फ़िल्म पर अपनी थ्योरी शेयर की, और ये सच में माइंड ब्लोइंग है.

मेरे पास अंधाधुन के बारे में एक थ्योरी है. श्रीराम राघवन आप जीनियस हैं. फ़िल्म देखकर मैं बार-बार यही सोच रही थी कि आकाश (आयुष्मान) के पास एक बिल्ली होती है. ये कोई और Pet भी हो सकता था. फिर बिल्ली ही क्यों?

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, ये माना जाता है कि एक बिल्ली के नौ जीवन होते हैं. बिल्ली एक ऐसा जानवर है, जिसके लिए कहा जाता है कि वो उन गंभीर दुर्घटनाओं में भी बच जाती हैं, जिनमें आमतौर पर दूसरे जानवर या इंसान नहीं बचते हैं. और फ़िल्म में भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया है, हीरो यानि आकाश ऐसी ही 9 गंभीर एक्सीडेंट्स में बच जाता है:

1. पहला स्कूटी एक्सीडेंट: ये काफ़ी भयानक और घातक हो सकता था, लेकिन आकाश बच जाता है.

2. पियानो सीन: जब वो सिम्मी (तब्बू) के घर जाता है और वहां सिम्मी के पति को ख़ून से लथपथ देखता है, जिसका मर्डर किया होता है. इस सिचुएशन में अगर वो ये ज़ाहिर कर देता कि वो देख सकता है, तो उसकी भी मौत निश्चित थी.

3. तीसरा सीन: जब पुलिस इंस्पेक्टर मनोहर आकाश की कंप्लेंट के बाद उसकी बिल्ली को ढूंढने के लिए उसके घर आता है. बहुत ही डरावना और जानलेवा था ये सीन.

4. ज़हरीली मिठाई: जिस मिठाई को खाकर सच में उसकी आंखों की रौशनी चली जाती है, जान भी तो जा सकती थी.

5. जानलेवा हमला: जब मनोहर आकाश को मारने के लिए चुपके से उसके घर आता है.

6. किडनी ट्रांसप्लांट: जब हॉस्पिटल में ऑटो वाला, लॉटरी वाली औरत और डॉक्टर उसकी आंख ठीक करने के बहाने उसकी दोनों किडनियां निकालने वाले होते हैं. सोचो अगर ऐसा हो जाता, तो बस वहीं खेल ख़त्म.

7. हॉस्पिटल सीन: जब तब्बू आकाश को मारने में लगभग कामयाब होने ही वाली थी. अगर वो डॉक्टर आकाश को न बचाता.

8. 2nd लास्ट सीन: जब होता है कार का एक्सीडेंट, जिसमें सिम्मी (तब्बू) की मौत हो जाती है, लेकिन इस भयानक एक्सीडेंट से पहले ही आकाश कार में से उतर जाता है.

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तो अब समझ आया न कि फ़िल्म के एंड में आकाश अपनी 9वीं ज़िन्दगी जी रहा था.

समझ दिमाग़ की बैंड बज गई भाई... क्या थ्योरी निकाली है. सलाम है!

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