कहीं सफ़र में हों या बाहर गए हों, पीने का साफ़ पानी ढूंढना एक मुश्किल काम होता है. इस काम को हमारे लिए आसान बनाता हैं पैक्ड वॉटर, यानि बोतल में मिलने वाला पानी. पिछली कड़ी में हमने आपको पानी की बोतल पर लिखे अलग-अलग लेबल्स का मतलब समझाया था. आज हम आपको इससे जुड़ी कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें बता रहे हैं. ये वो सवाल हैं, जो लोगों के दिमाग में तो आते हैं, पर इनका जवाब नहीं मिल पाता.

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1. Naturally Sourced पानी टैप वॉटर से कैसे अलग है?

बोतलों में मिलने वाला पानी ज़्यादातर Naturally Sourced ही होता है. यानि इसे प्राकृतिक स्त्रोतों से लाया जाता है. इसमें अलग-अलग तत्व पाए जाते हैं. इसे इस तरह पैक किया जाता है कि इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व बरक़रार रहें.

टैप वॉटर को केमिकलों की मदद से साफ़ किया जाता है. इसमें क्लोरीन जैसे तत्व होते हैं.

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2. क्या जमाये गए पैक्ड पानी को या कार में छोड़े गए पैक्ड पानी को पीना हानिकारक होता है?

ये एक मिथक है, लेकिन बोतल को खोलने के कुछ दिनों के अन्दर ही इस पानी को पी लिया जाना चाहिए. अगर मुंह लगा कर बोतल से पानी पिया गया है, तो पानी में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे पानी का स्वाद भी बदल जाता है. इसलिए इसे जल्दी ख़त्म कर लेना चाहिए.

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3. एक बोतल पैकेज्ड पानी बनाने में असल में कितना पानी लगता है?

एक लीटर पैकेज्ड पानी बनाने में 1.53 लीटर पानी लगता है.

4. क्या प्लास्टिक की बोतल को रीसायकल किया जा सकता है?

हां, PET (Polyethylene Terephthalate) की बोतलें 100% Recyclable होती हैं.

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5. क्या प्लास्टिक की बोतलों को दोबारा इस्तेमाल करना चाहिए?

पानी की बोतलें दोबारा इस्तेमाल करने के उदेश्य से नहीं बनायीं जाती हैं. इन्हें रीसायकल किया जा सकता है पर रीयूज़ नहीं.

6. Purified Water और Mineral Water में क्या अंतर है?

Purified Water आपको ज़्यादातर पैक्ड पानी की बोतलों पर लिखा दिखेगा. इस पानी को Reverse Osmosis जैसी प्रक्रियाओं से साफ़ किया जाता है.

Mineral Water में Calcium, Potassium और Iron जैसे तत्व घुले होते हैं. जब बोतल वाले पानी में 250 PPM (Parts-Per-Million) मिनरल घुले होते हैं, तब उसे मिनरल वॉटर कहा जाता है.

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