1973 में 'गरम हवा' से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले अभिनेता फ़ारूख शेख़ ने 'शतरंज के खिलाड़ी', 'चश्‍मे बद्दूर' और 'किसी से न कहना', जैसी कई फ़िल्मों में शानदार अभिनय कर दर्शकों का दिल जीता. बड़े पर्दे के साथ-साथ उन्होंने छोटे पर्दे पर भी एक सफ़ल पारी खेली. फ़ारूख शेख़ सिर्फ़ दमदार एक्टर ही नहीं, बल्कि नेक और ज़िंदादिल इंसान भी थे. इस बात का पता उनके द्वारा किये गये नेक और सराहनीय कामों से चलता है.

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इस तरह की एक पीड़ित परिवार की मदद

26/11 वो दिल दहला देने वाली घटना, जो आज भी लोगों को अंदर तक झकझोर कर रख देती है. मुंबई पर इस ख़तरनाक अटैक के बाद फ़ारूख शेख़ की नज़र इंडियन एक्सप्रेस पर छपी एक ख़बर पड़ी. ये कहानी थी श्रुति कांबले नामक एक महिला की जिसने इस आतंकी हमले में अपने पति राजन को खो दिया था. ताज होटल में काम करने वाले राजन वहां रुकने वालों मेहमानों की सुरक्षा करते वक़्त आतंकियों का शिकार हो गये थे. पति की मौत के बाद अब श्रुति को अपने दोनों बेटों रोहन और आर्थव की ज़िम्मेदारी अकेली ही उठानी थी.

अपने दोनों बेटों के लिये राजन ने एक सपना देखा था. वो रोहन को मिलिट्री स्कूल में शिक्षा दिलाना चाहते थे, तो दूसरे को पायलट बना कर आसमान में उड़ता देखने की चाह थी. इसके बाद फ़ारूख शेख ने इंडियन एक्सप्रेस को कॉल कर बच्चों की शिक्षा के लिये फंड देने की इच्छा जताई, लेकिन इस शर्त पर कि उनका नाम गुप्त रखा जायेगा.

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वो हर साल बिना किसी पूछताछ के एकेडमिक फ़ीस के लिये चेक भेजते रहे. वहीं श्रुति को आज तक इस बात का मलाल है कि वो एक्टर की मौत से पहले एक बार भी उन्हें शुक्रिया नहीं कह पाई.

फ़ारूख शेख भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कलाकारी और दरियादिली हमेशा याद की जायेगी.

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