किसी मॉडल या एक्ट्रेस को बिकिनी पहने बहुत बार देखा है, लेकिन ये ख़्याल कभी नहीं आया कि बिकिनी ने अपनी यात्रा कैसे की. भारत में भले ही किसी आम इंसान का बिकिनी पहने देखे जाना आज भी Rare Sights में से एक है, लेकिन दुनिया में भी जब पहली बार बिकिनी आयी थी, तो हर किसी के कान खड़े हुए थे.

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अपने पहले दिन से लेकर अभी तक बहुत ख़ास और मज़ेदार रही है इस टू-पीस स्विम ड्रेस की जर्नी:

अमेरिका में परमाणु परीक्षण साइट का नाम है बिकिनी

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Surprise मिला न? बिकिनी को बनाने वाले Louis Reard ने अपनी इस बोल्ड ड्रेस का नाम US Pacific Nuclear साइट पर रखा. 1940 का वो दशक था, जब दुनिया के सामने ये नाम आया और कभी न भूलने वाला नाम बन गया.

Louis कोई डिज़ाइनर नहीं, ऑटोमोबाइल इंजीनियर थे

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बिकिनी किसी फैशन डिज़ाइनर नहीं, एक इंजीनियर के दिमाग की उपज थी. वैसे इसे बनाने के बाद Louis का नाम दुनिया के सबसे बड़े डिज़ाइनर के रूप में स्थापित हो गया था.

मॉडल नहीं, डांसर थी बिकिनी पहनने वाली महिला

लुइस को अपनी इस बोल्ड ड्रेस के लिए कोई मॉडल नहीं मिल रही थी इसलिए उन्होंने डांसर Micheline Bernardini को इसके लिए ढूंढा.

सबसे पहली बिकिनी ने पास किया था रिंग टेस्ट

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Louis का मानना था कि बिकिनी को एक अंगूठी के अंदर से निकल जाना चाहिए और उनका पहला बिकिनी पीस ऐसा ही था. Micheline ने जब पहली बार इसके लिए पोज़ किया था, तो उनके हाथ में एक बेहद छोटा बॉक्स था, जिसमें शायद रुमाल जितनी जगह हो. इस बॉक्स में बिकिनी आसानी से आ जाती थी.

फ़िल्मों ने फ़ेमस की बिकिनी

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बिकिनी को ट्रेंड बनाने में सबसे बड़ा रोल हॉलीवुड फ़िल्मों का था. इन सभी फ़िल्मों मं बीच के बिकिनी दिखा कर, इसे Popularize करने की कोशिश की गयी.

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