पश्चिम अफ्रीका का देश, घाना जल्द ही चमड़ी को गोरा करने वाले केमिकल्स पर बैन लगाने वाला है. चमड़ी को ब्लीच करने के लिए Hydroquinone नाम का केमिकल उपयोग होता है, जिसके कई हानिकारक प्रभाव होते हैं, जैसे खुजली, छाले, दाग-धब्बे और वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि इस केमिकल से कैंसर होने का भी खतरा होता है. आधी से ज़्यादा Skin Whitening Creams में ये केमिकल पाया जाता है. घाना में करीब 70% महिलाएं गोरी होने के लिए ऐसी क्रीम्स का उपयोग करती हैं. जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन में ये केमिकल पहले से ही बैन है.

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पर इन Fairness Creams का असर सिर्फ़ शारीरिक ही नहीं, सामाजिक भी है. घाना के कई सेलिब्रिटीज़ इन Fairness Creams के ब्रांड एम्बेसडर बने हुए हैं. और इस कारण काली और गोरी चमड़ी के बीच भेदभाव किया जाता है. यही हालात भारत के भी हैं. हमारे देश में गोरी चमड़ी सुंदरता का मापदंड माना जाता है. अगर लड़की या लड़का गोरा है, तो वो सुन्दर है. समाज में उसे सम्मान की नज़रों से देखा जाएगा और गेहुआं या श्याम रंग के लोगों पर कटाक्ष किया जायेगा कि 'तुम इतने काले क्यों हो?'

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यही कारण था कि नंदिता दास ने ऑनलाइन आंदोलन, 'Stay Unfair, Stay Beautiful' शुरू किया था. कंगना रनौत ने भी एक सुप्रसिद्ध Fairness Cream का ऐड करने से मना कर दिया था. देश के ग्रामीण इलाकों में ऐसी Fairness Creams बहुत प्रचलित हैं, क्योंकि हमारे मन में एक निराधार मान्यता कि गोरे लोग सुन्दर, मनमोहक और सफल होते हैं. ये भी एक प्रकार का रंगभेद है, जो समाज को बांटता है.

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इसीलिए घाना सरकार का Hydroquinone को बैन करने का फैसला बहुत अच्छा है. आशा करते हैं कि दूसरे देश भी इससे उदहारण लेकर Fairness Creams पर पाबंदी लगाएंगे, खासकर भारत. क्योंकि यहां आज भी गोरे-गोरे मुखड़े पर काला-काला चश्मा को सुन्दर समझा जाता है.

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