वैसे तो गंगा नदी के तटों पर सैकड़ों शहर और हज़ारों गांव बसे हैं, मगर इन सबमें हरिद्वार की तो बात ही अलग है. हरिद्वार गंगा मां के तटों पर बसी पहली विस्तृत बसावट है. जहां का जल आज भी इतना साफ-सुथरा है कि एक स्नान से ही आत्मा तृप्त हो जाती है. हालांकि हिन्दू धर्म की ग्रंथावलियों में इसके महिमा की ख़ासी चर्चा की गई है. वहीं हिन्दू धर्म से जुड़े लोगों का मानना है कि इन प्रमुख घाटों पर स्नान-ध्यान करने से मनुष्य के सारे पाप कट जाते हैं.

ऐसी आम मान्यता है कि देवताओ और राक्षसों के बीच हुए युद्ध के दौरान अमृत की कुछ बूंदें चार जगहों पर गिरी थीं. इन चारों जगहों को हरिद्वार, इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन के तौर पर जाना जाता है. उसी समय से हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि यहां लगने वाले कुंभ मेले के 42 दिनों के दौरान इन जगहों पर गंगा अमृत के रूप में बहती हैं.

तीर्थनगरी हरिद्वार शिवालिक रेंज की पहाड़ियों पर स्थित है. इसे देवताओं का द्वार भी कहा जाता है. प्राचीन काल में इसे गंगाद्वार, तपोवन और मायापुरी के नाम से जाना जाता था.

हरिद्वार का कुशवार्ता घाट मराठा रानी अहिल्याबाई द्वारा बनवाया गया था. यहां दिवंगत आत्माओ का श्राद्ध किया जाता है. इस घाट को लेकर कई बातें भी यहां कही-सुनी जाती है. कहा जाता है कि यह घाट दत्तात्रेय से संबंधित है जो एक पहुंचे संत थे. यदि यहां के लोगों की मानें तो दत्तात्रेय ने इस घाट पर एक हज़ार वर्ष तक सिर्फ़ एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की थी.

हरिद्वार का यह मनोरम घाट हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ से भरा रहता है. इस घाट का नाम भगवान विष्णु के नाम पर रखा गया है. ऐसी मान्यता है कि इस घाट पर स्वयं भगवान विष्णु ने स्नान किया था. इस घाट पर स्नान मात्र से सारे पाप धुल जाते हैं.

यहां गौ घाट के नज़दीक सुभाष घाट है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस घाट का नाम कामधेनु के नाम पर रखा गया था. इसलिए ऐसा लोगों का मानना है कि इस घाट पर स्नान करने से सारी मनोकामनाए पूरी हो जाती हैं. गौरतलब है कि इंदिरा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी की अस्थियां भी यहीं प्रवाहित की गई थीं.

यहां मौजूद हरकी पौड़ी घाट को राजा विक्रमादित्य ने उनके भाई भ्रीथरी की याद में बनवाया था. ऐसी मान्यता है कि यहां राजा विक्रमादित्य के भाई ने तपस्या की थी. इसे ब्रम्हकुंड के नाम से भी जाना जाता है. यहां रोज शाम महा आरती होती है जिसे देखने हेतु पूरी दुनिया से लोग यहां आते हैं. यहां का स्नान बेहद पुण्यकारी माना जाता है.

सुभाष घाट हरकी पौड़ी के नज़दीक स्थित है. यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक मूर्ति लगी है. यहां एक स्वैच्छिक सेवा समिति है जो श्रद्धालुओं को मुफ़्त में चिकित्सीय सेवा देता है.

यहां एक अस्थि पर्वथा घाट भी है जहां अस्थियों का विसर्जन होता है, और जैसा कि नाम से ही विदित हो रहा है यह घाट हरिद्वार का बेहद प्रमुख घाट है. पर्यटक और श्रद्धालु यहां आकर पवित्र गंगा में स्नान करते हैं. ऐसी मान्यता है कि सागर के छह करोड़ बेटों ने यहीं मुक्ति प्राप्त की थी.

I/I Source: amarujala
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