बचपन से हम ऐसी कहानियां सुनते आ रहे हैं कि भूत-प्रेत और आत्मा कब्रिस्तान में होती हैं. रात को अंधेरा होते ही वे कब्रिस्तान में घूमना शुरू कर देती हैं, इसलिए रात के समय ऐसी जगहों पर नहीं जाना चाहिए. लेकिन किसने कहा कि यह प्रेतात्माएं केवल कब्रिस्तान में ही होती हैं? लेकिन कुछ जानकार मानते हैं कि भारत में ऐसी कई इमारते हैं, जहां भूत-प्रेत या आत्माएं भटकती रहती हैं, जिस कारण ये जगहें हमेशा सुर्खियों में रहती हैं. ऐसी ही जगहों में भारत के कई रेलवे स्टेशन्स आते हैं. वैसे तो रेलवे स्टेशन को भीड़-भाड़ वाली जगह माना जाता है. लेकिन ज़रा सोचिये अगर आपको किसी भुतहा रेलवे स्टेशन पर अकेला छोड़ दिया जाए, तो आपका क्या हाल होगा? सोचकर ही डर लग रहा है ना.

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लेकिन हाल ही में खबर आई है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित 'बेगुनकोदोर रेलवे स्टेशन' जिसे वहां के लोग एक भूतिया जगह मानते हैं, को पर्यटकों के लिए खोलने विचार किया जा रहा है. जी हां, ये सच है. जल्द ही एक पैरानॉर्मल रिसर्च टीम एक लोकल टूर ऑपेरटर के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल के इस भूतिया स्टेशन के लिए Guided Tours को आयोजित करेगा.

हममें से बहुत से लोग इस आइडिया से सहमत होंगे और इस तरह की भुतहा जगहों को देखना भी चाहेंगे क्योंकि हमको एडवेंचर पसंद है. लेकिन शायद ही भारत में कोई एक ऐसी जगह है, जहां के लिए के लिए Ghost Tourism को आधिकारिक तौर पर मान्यता मिली हो.

भुतहा जगह के रूप में पश्चिम बंगाल में स्थित 'बेगुनकोडोर रेलवे स्टेशन' को देश के सबसे डरावने स्टेशन्स में से एक माना गया है. यहां पर भूतों का डर इतना है कि इसको पिछले सालों से बंद रखा गया है. स्थानीय लोग मानते हैं कि इस स्टेशन पर जाने वाला व्यक्ति जिन्दा नहीं बचता है. वे कहते हैं कि यहां एक भूतनी का वास है, जो सफेद साड़ी पहनती है. यह वर्ष 1967 की बात है जब रेलवे के ही एक कर्मचारी ने अचानक स्टेशन ने भी सफेद साड़ी वाली औरत को देखा था. धीरे-धीरे इस स्टेशन पर काम करने वाले अधिकारियों ने यहां काम करना बंद कर दिया. एक कर्मचारी ने वहां रुकने का फैसला तो किया, लेकिन दूसरे दिन ही वो वहीं मृत पाया गया. उसके बाद ही इस जगह को भुतहा घोषित कर हमेशा के लिए बंद कर दिया गया.

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साल 2009 में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन रेलवे मिनिस्टर ममता बनर्जी ने इन खबरों को बकवास करार देते हुए इस स्टेशन को दोबारा खोलने का फैसला किया. उसके बाद कुछ ट्रेन्स यहां रुकने लगीं, लेकिन उसके बाद भी यहां के स्थानीय लोग इस रेलवे स्टेशन के आस-पास भी जाने से डरते थे.

एक रिपोर्ट के अनुसार, स्टेशन की क्षमता को देखते हुए और जिज्ञासु यात्रियों को आकर्षित करने के लिए कोलकाता की एक पैरानॉर्मल रिसर्च संस्था अब पूरी तरह से 'बेगुनकोदोर रेलवे स्टेशन' को राज्य के नक्शे पर एक पर्यटन स्थल के रूप में दुनिया के सामने लाने के लिए तैयार है. पैरानॉर्मल रिसर्च संस्था ने एक स्थानीय टूर ऑपेरटर 'पुरुलिआ टूरिज़्म' के साथ मिलकर ये कदम उठाया है. इसके साथ सिस्टेमैटिक पैरानॉर्मल इंवेस्टिगेशन और रिसर्च टीम जल्दी ही इस हॉन्टेड रेलवे स्टेशन के लिए गाईडेड टूर्स आयोजित करने वाली है.

इनकी टीम पर्यटकों के लिए एक पैकेज देगी जिसमें ट्रेवल, होटल और मिडनाइट में इस स्टेशन को घुमाना शामिल होगा. जहां पर 'बेगुनकोदोर रेलवे स्टेशन' के इतिहास की कहानी को भी पर्यटकों को सुनाया जाएगा.

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पैरानॉर्मल रिसर्च टीम की सदस्य और मेकैनिकल इंजीनियर सुमन रॉय के अनुसार, 'हम लोगों को पैरानॉर्मल एक्टिविटीज का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं. हम रेलवे स्टेशन पर ठीक वैसा ही एटमॉस्फियर क्रिएट करेंगे ताकि लोगों को मज़ा आए. इसके लिए लोगों के रिस्पांस को देखते हुए जल्द ही हम अपनी फर्स्ट ट्रिप का अनाउंसमेंट करेंगे.' फिलहाल के लिए हम केवल इस ट्रिप के शुरू होने का इंतज़ार कर सकते हैं लेकिन ऐसी यात्रा पर जाने का अनुभव बेहद रोचक होगा.

तो क्या आपका भी यही मानना है ना कि कम से कम एक बार तो इस तरह का रोमांचक अनुभव करना ही चाहिए.

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