मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, अपने नये-नये फ़ैसलों की वजह से हमेशा ख़बरों में बनी रहती है. पिछले 92 सालों से देश में 'रेल बजट' और 'आम बजट' अलग-अलग आता था. मोदी सरकार इस परम्परा को तोड़ते हुए, इस साल दोनों बजट संयुक्त रूप से पेश करने वाली है. अपने हैरान कर देने वाले फ़ैसलों के लिए मशहूर, यह सरकार इस बजट में कई नये-नये फ़ैसले उठा कर आम से लेकर ख़ास तक सभी को चौंका सकती है. इन नये फ़ैसलों में एक फैसला यह हो सकता है कि मोदी सरकार रेल किराये में छूट या रियायत के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दे.

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इस कदम की घोषणा वित्त मंत्री, अरुण जेटली 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट के दौरान कर सकते हैं. इस कदम के पीछे सरकार की यह मंशा बताई जा रही है कि इसके ज़रिए सुविधाओं का दुरुपयोग करने वालों पर नज़र रखी जा सकेगी. इसके साथ ही सुविधाओं को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी.

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फ़िलहाल देखा जाये, तो रेलवे 50 से ज़्यादा अलग-अलग श्रेणियों को किराये में छूट प्रदान करता है. इनमें सबसे ज़्यादा लोग सीनियर सिटीज़न, डॉक्टर, पेशेंट, स्पोर्ट्स पर्सन, स्टूडेंट्स, रिसर्च स्कॉलर की केटेगरी में आते हैं. इनमें भी सबसे ज़्यादा सीनियर सिटीज़न केटेगरी के लोग होते हैं. वर्तमान समय में रेलवे सीनियर सिटीज़न्स को ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा पहुंचाने के लिए अलग से भी एक विशेष प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.

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सरकारी डाटा के हिसाब से अब तक देश में 100 करोड़ से ज़्यादा लोगों को आधार या यूनिक आइडेंटिफिकेशन कार्ड (UID) से जोड़ा जा चुका है. सरकार के इस फ़ैसले के बाद टिकटों की कालाबाज़ारी पर लगाम लगाने में काफ़ी मदद मिलेगी.

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रेलवे और आम बजट पेश करने वाली मोदी सरकार के इस बजट से लोगों को काफ़ी उम्मीदें हैं. नोटबंदी के फ़ैसले के कुछ ही समय बाद आने वाले इस बजट से व्यापारियों से लेकर आम जन में काफ़ी उत्सुकता बनी हुई है. 1 फरवरी को आने वाले इस बजट में देखना होगा, सरकार किसे ख़ुश करती है और किसे निराश.