हमारे देश में खाने की बर्बादी एक बहुत बड़ी समस्या है. चाहे घर हो, या कोई बिग फ़ैट इंडियन वेडिंग, लोग बड़ी बेतरतीबी से खाने की बर्बादी करते हैं. कुछ महापुरुष और महामहिलाएं तो ऐसे हैं, कि खाने की बर्बादी को भी स्टेटस सिंबल से जोड़ देते हैं. जिस देश में आज भी लोग भूख से मरते हों, वहां ऐसी रईसी तो बिल्कुल भी शोभा नहीं देती. गरीबी का आलम देखिए, ख़बरों में तो यहां तक सुनने को मिल जाता है कि फ़लाना जगह पर कोई गरीब अपना ही मल गर्म कर के खाने को मजबूर है. खाने की बर्बादी को रोकने के लिए बहुत सारे एनजीओ भी काम कर रहे हैं.

अब इसी बर्बादी को रोकने के लिए मोदी सरकार ने भी कमर कस ली है. सरकार ने अमीरों का पेट काटने का निश्चय कर लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने 'मन की बात' कार्यक्रम में देश में हो रहे खाने की बर्बादी पर चिंता जताई थी.

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केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, राम विलास पासवान ने एक बयान में कहा, 'अगर कोई व्यक्ति दो Prawn ही खा सकता है, तो उसे 6 Prawn क्यों परोसा जाए? खाने के साथ ही ये किसी भी व्यक्ति के कठिन परिश्रम से अर्जित धन की भी बर्बादी है. लोग उस चीज़ के भी पैसे भरते हैं, जो वो खा भी नहीं पाते.' मंत्री जी के बात में दम तो है. कई बार हम रेस्त्रां में या तो ज़बरदस्ती खाते हैं, या खाना छोड़ देते हैं.

खाद्य मंत्रालय रेस्त्रां और होटल मालिकों के लिए एक प्रश्नावली तैयार करवा रही है, जिसमें मालिकों को इस बात का जवाब देना होगा कि किसी भी उपभोक्ता को कितना खाना परोसा जाना चाहिए.

मंत्री जी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से हुई बातचीत में बताया, 'होटल और रेस्त्रां के मालिक तो खुद ही एक्सपर्ट हैं, उन्हें ये पता ही होगा कि किस व्यक्ति को कितना खाना परोसा जाना चाहिए. हम उनके साथ बहुत जल्द ही एक मीटिंग करेंगे.' गौर करने वाली बात यह है कि मंत्री जी ने यहां ढाबे वालों या छोटे होटल वालों का नहीं, पर 5 सितारा और बड़े होटल के मालिकों की बात की है.

पिछले महीने के मन की बात कार्यक्रम में हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने गरीबों के साथ हो रहे अन्याय की तरफ़ इशारा किया था. देर से सही, उन्हें भूख से मर रहे लोगों की याद तो आई.

जो सरकार ये तय करती हो, कि हम किससे प्यार कर सकते हैं या किससे नहीं, वो अगर हमारे खाने के प्लेट को भी नापना शुरू करे, तो इसमें कोई हैरत की बात नहीं है.

देखने वाली बात यह होगी की सरकार ये निर्णय कैसे करेगी कि किसे कितना खाना है?

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जब तक सरकार किसी निर्णय पर नहीं पहुंचती, तब तक हम ही थोड़ा Judgemental हो जाते हैं. ये हैं हमारी तरफ़ से कुछ प्रस्ताव, जिसके अनुसार सरकार किसी की थाली में खाने की मात्रा डिसाइड कर सकती है-

मोटापा- Bodyshaming के वक़ील थोड़ी देर के लिए परे हट जाएं. सरकार के पास ये हक़ है कि वो आपके Physique के अनुसार आपकी खाने की क्वांटिटी तय करे.

कपड़े- जिसने जितने ज़्यादा कपड़े पहने हों, उसे उतना ही भोजन दिया जाएगा (मोहल्ले की कुछ आंटियों की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहेगा. क्योंकि शर्मा जी की लड़की को किसी भी होटल में वन-पीस पहनने का मौका नहीं मिलेगा.)

राष्ट्रगान- राष्ट्रगान सुर में गाने वालों को एक्सट्रा रस-मलाई दी जाएगी.

जेएनयू के छात्र- जेएनयू के छात्रों से भारत माता की जय सुन लेने के बाद ही मेन कोर्स परोसा जाएगा.

भगवा- भगवा रंग धारियों को बिल पर 50 पर्सेंट की छूट दी जाएगी.

गौ सेवा- होटल में ऐंट्री से पहले गौ माता की पूजा अनिवार्य है.

नोट: ऐसी कोई प्रस्तावना जारी नहीं की गई है. ये बस मज़े के लिए लिखा था. कृपया इसे हमारी Ideology से जोड़कर न देखें.

सरकार की ओर से ऐसे किसी भी फ़ैसले का दिल और दिमाग़ से स्वागत है. हम एडवांस में ही आपसे अपील करते हैं कि कम से कम खाने की बर्बादी करें. अगर आपके घर में खाना बच जाए, तो किसी ज़रूरतमंद को दे दें, कुछ और नहीं तो एक प्यारी सी हंसी तो मिल ही जाएगी.

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