मां-बाप अपने बच्चे को ज़रा-सी चोट लगने पर कांप जाते हैं. मगर आज एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हिम्मत की अलग ही मिसाल बनाई है. दरअसल, सूरत में अपनी बेटी के अंगदान कर मां-बाप ने कई लोगों को जीवनदान दिया है. हुआ ये कि 21 साल की उनकी बेटी जाह्नवी पटेल शनिवार की रात करीब 10 बजे कार के बोनट पर बैठी थी. तभी किसी ने कार चला दी और वो गिर पड़ी. फिर उसे निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसका इलाज शुरू हुआ.

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बीते सोमवार न्यूरोसर्जन डॉ. अशोक पटेल और न्यूरो फ़िजिशियन डॉ. अनिरुद्ध आप्टे ने जाह्नवी को ब्रेन डेड बता दिया. इसके बाद डोनेट लाइफ़ संस्था के प्रमुख नीलेश मांडलेवाला ने जाह्नवी के माता-पिता को ऑर्गन डोनेशन की बात बताई, कि किस तरह वो कई लोगों की जान बचा सकते हैं. इस बात पर उसके माता-पिता ने जाह्नवी के अंगदान करने पर सहमति दी. नीलेश ने मुंबई और अहमदाबाद में संपर्क कर अंगदान कराया.

ग़ौरतलब है कि जाह्नवी के हार्ट को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस से सूरत से 269 किमी की दूरी को 1 घंटा 47 मिनट में तय करके मुंबई में मुलुंड के फ़ॉर्टिस अस्पताल पहुंचाया गया. ये शहर का 21वां हृदय दान है. हृदय सूरत के ही रहने वाले 26 वर्षीय लालजी को ट्रांसप्लांट किया गया. 2014 में लालजी के हार्ट की पंपिंग क्षमता 15 प्रतिशत थी. बीते कुछ महीने से ये दो प्रतिशत रह गई. डॉक्टरों ने हार्ट ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपचार बताया था. उन्हें 38 दिन से लेफ़्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (LVAD) पर रखा गया था.

इसके अलावा, उसकी एक किडनी अहमदाबाद निवासी 47 वर्षीय नरेश राजपरा को और दूसरी रांची निवासी 42 वर्षीय राकेश कुमार झा को दी गई. लीवर अहमदाबाद निवासी 47 वर्षीय जिज्ञाबेन पटेल को दिया गया. जाह्नवी वेसू के सोमेश्वर एंक्लेव में स्वास्तिक अपार्टमेंट में रहती थी.

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अब तक सूरत से 21 हार्ट दान किए जा चुके हैं. इसके अलावा 281 किडनी, 115 लीवर, 6 पैंक्रियाज़ और 230 कॉर्निया दान हुई हैं. इससे 540 लोगों को जीवन मिला है.

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