गुलज़ार वो इंसान है, जिसने जैनरेश्न गैप ख़त्म किया है. सिर्फ़ एक दो पीढ़ियों के बीच की नहीं, 4 पीढियों की. एक ही घर में एक छोटा बच्चा भी गुलज़ार के गीत गाता है, उसके सयाने भाई/बहन भी गुलज़ार से आशिकी सीखते हैं, मम्मी/पापा भी यादों में उनके गीत गुनगुनाते हैं और दादा/दादी भी गुलज़ार के लिखे गानों से सुकून पाते हैं.

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संपूर्ण सिंह कालरा जिन्हें हम गुलज़ार के नाम से जानते हैं. गुलज़ार का जन्म अब के पाकिस्तान में 18 अगस्त, 1934 में झेलम ज़िले में हुआ था. बंटवारे के बाद परिवार हिन्दुस्तान में आ कर बस गया.

रोज़ी-रोटी की ख़ातिर संपूर्ण सिंह कालरा गैराज में मकैनिक का काम किया करते थे, लेकिन लिखने का शौक़ था, जिसे घर वाले नापसंद करते थे. इसलिए संपूर्ण सिंह गुलज़ार दीनवी के नाम से लिखते थे, जिसे बाद में छोटा कर के सिर्फ़ गुलज़ार कर दिया और हमेशा के लिए गुलज़ार हो गए.

एक गीतकार के तौर पर गुलज़ार का फ़िल्मी सफ़र शुरु होता है 'बंदिनी'(1963) से. इसके बाद वो लगातार लिखते रहते हैं, लेकिन पहली बड़ी सफ़लता मिलती है 1969 में आई 'ख़ामोशी' के इस गाने से, 'देखी है उन आंखों की महकती खु़शबू'. इसके बाद तो गलज़ार ने कभी ढलान देखी ही नहीं. गुलज़ार वो गीतकार बन गए, जिनके साथ हर गायक और संगीतकार काम करना चाहता है.

गीतकार के अलावा गुलज़ार की एक दूसरी बड़ी पहचान संवाद लेखक के रूप में भी है. इस रूप में भी गुलज़ार सफ़ल हुए. आनंद, गुड्डी, चाची 420, बावरची जैसी फ़िल्मों के लिए उन्होंने डायलॉग्स भी लिखे हैं.

बात जब पहचान की हो रही है, तो कोई निर्देश्क गुलज़ार को कैसे भूल सकता है. मासूम, लिबास, अचानक, माचिस इन फ़िल्मों को कोई कैसे भूल सकता है. मगर हां, एक निर्देश्क के तौर पर गुलज़ार ने तारीफ़ें तो ख़ूब बटोरीं, लेकिन कभी सफ़लता का स्वाद नहीं चखा.

गुलज़ार ने फ़िल्मों के अलावा टीवी सीरियल भी निर्देशित किया और लिखा है. उनकी सबसे प्रसिद्ध टीवी सीरियल है मिर्ज़ा ग़ालिब और तहरीर मुंशी प्रेमचंद की.

फ़िल्मों के अलावा गुलज़ार ने कविताएं, नज़्में और ग़ज़लें भी लिखी हैं, जो कई किताबों की शक़्ल में प्रकाशित हो चुकी हैं. बटवारें के ऊपर उन्होंने एक नॉवेल भी लिखी है.

उनकी एक रचना है 'त्रिवेणी', जो कि अपने आप में एक लेखनी का प्रकार है, जिसे गुलज़ार ने इजाद किया है. आमतौर पर एक शेर दो वाक्य का होता है. त्रिवेणी की ख़ासियत ये है कि वो तीन वाक्यों से बनती है और उसमें भी उसके पहले दो वाक्य ख़ुद में संपूर्ण अर्थ लिए होते हैं और तीसरे वाक्य से वो पूरे अर्थ को एक अलग आयाम देते हैं.

गुलज़ार ने अदाकारा राखी से शादी की. राखी भी अपने समय में सफ़ल एक्ट्रेस थी. उनकी बेटी मेघना गुलज़ार भी फ़िल्मों से जुड़ गई हैं. मेघना ने अपनी पिता की जीवनी भी लिखी है.

गुलज़ार इकलौते भारतीय लेखक होंगे, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतने पुरस्कार मिले हैं. फ़िल्म स्लमडॉग मिलेनियर का गीत 'जय हो' के लिए गुलज़ार को ऑस्कर के अलावा ग्रैमी अवार्ड, 20 फ़िल्मफ़ेयर, कई राष्ट्रीय पुरस्कार, साहित्य अकेडमी, दादा साहब फ़ालके अवॉर्ड मिल चुका है. 2004 में गुलज़ार को पद्म भूषण सम्मान भी दिया गया है.

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