परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद से ही तनाव से आत्महत्या कर लेने वाले छात्रों की दुखद खबरें भी आने लगती हैं. ऐसे बच्चों के लिए ये कहानी प्रेरणा साबित हो सकती है. राजकरण बरुआ, 19 बार M.Sc. एग्ज़ाम में असफ़ल हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

हाल ही में मध्य प्रदेश में बोर्ड रिज़ल्ट की घोषणा के बाद, 12 छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी, लेकिन राजकरण कहते हैं 'अगर किसी एग्ज़ाम में फ़ेल होना, जिंदगी ख़त्म करने के लिए काफ़ी होता, तो मैं 19 बार मर चुका होता.'

मध्य प्रदेश के जबलपुर के राजकरण, बचपन से घरेलू नौकर का काम कर रहे हैं. वह 1997 से रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी से गणित से एमएससी करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसमें सफ़ल नहीं हो पाए हैं.

उन्होंने 1993 में ग्रैजुएशन पूरी की थी. उनकी ग्रैजुएशन करने की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है. उन्होंने रद्दी में मिलने वाली पुरानी किताबें पढ़कर ग्रैजुएशन की परीक्षा दी. सारा संघर्ष उन्होंने मास्टर्स करने के सपने के लिए किया और आज भी उनका ये संघर्ष जारी है.

बरुआ कहते हैं कि छात्रों को खुदकुशी करते देख उनको दर्द होता है और उन्हें हैरत होती है कि एक परीक्षा में फ़ेल होने पर छात्र खुद को इतना अवांछित क्यों समझने लगते हैं. इसके साथ ही वो कहते हैं कि हर बार फ़ेल होने पर वो खुद को और मजबूत महसूस करने लगे.

उन्होंने कहा, "जब तक मैं मैथमेटिक्स में मास्टर्स पूरा नहीं कर लेता, तब तक पढ़ता रहूंगा और परीक्षा देता रहूंगा. छात्रों को अपनी असफ़लता और निराशा के बारे में अपने पेरेंट्स से बात करनी चाहिए. आत्महत्या कोई समाधान नहीं है.

Source: Indiatimes