गुजरात का एक छोटा सा गांव आनंद, जहां मुंबई से एक ट्रेन आ कर रुकी. कइयों की भीड़ में एक चेहरा वर्गीज़ कुरियन का भी था. विलायत से पढ़ कर आये वर्गीज़ को शायद उस समय ज्ञात नहीं था कि वो एक ऐसी क्रांति के जनक बनेंगे जो भारत के इतिहास का सबसे सुनहरा क्षण ले कर आएगी.

स्थानीय ट्रेड एसोसिएशन उस समय आनंद के कर्मठ डेरी किसानों का शोषण कर रही थी. इस छोटे से गांव के किसानों की व्यथा देख कर वर्गीज़ ने तय किया कि वो उनकी मदद करेंगे. इस एक कदम ने एक ऐसे आंदोलन की शुरुआत की जिसे आज हम अमूल या आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड के नाम से जानते हैं. इस यूनियन के ज़रिये हज़ारों डेरी किसानों एक साथ आये और मिल कर दूध और दुग्ध उत्पादों का उत्पादन करने लगे.

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इस आंदोलन ने आनंद के हज़ारों किसानों को समर्थ और समृद्ध बनाया. वहां की महिलाओं को आर्थिक और सामजिक रूप से सशक्त बनाया और दूध-अपूर्ण भारत को दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनाया. ये क्रांति सिर्फ़ आनंद या गुजरात तक ही सीमित नहीं रही. इसकी सफ़लता को देख कर पूरे देश में इस क्रांति की आग प्रज्वलित हो गयी और ये थी शुरुआत श्वेत क्रांति की जिसके प्रणेता थे श्री वर्गीज़ कुरियन.

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आज उनके जन्मदिन पर पूरा देश नेशनल मिल्क डे मना रहा है. गूगल ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए अपना डूडल बदल दिया है.

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अमूल के एड्स भी अपनी क्रिएटिविटी के लिए जाने जाते हैं. तो आज वर्गीज़ कुरियन के जन्मदिन पर आपको दिखाते हैं अमूल के कुछ सर्वश्रेष्ठ एड्स.

डॉ.कुरियन को भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण से नवाज़ा गया है. कई लोग मानते हैं कि इन्हें भारत रत्न ज़रूर मिलना चाहिए था. खैर ये सब तो राजनेताओं पर छोड़ देते हैं. सत्य तो ये है कि वर्गीज़ कुरियन का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. ग़ज़बपोस्ट की तरफ से डॉ. वर्गीज़ कुरियन को श्रद्धांजलि.