भारतीय क्रिकेट टीम में हमेशा से ही स्पिन गेंदबाज़ी का बोल-बाला रहा है. इतिहास में झांके तो कई नाम हैं, जिन्होंने स्पिन के जादू से दुनियाभर के बल्लेबाज़ों को परेशान किया है. लेकिन हमेशा से ही स्पिनर्स को शांत और तेज़ गेंदबाज़ों को अग्रेसिव छवि वाला समझा जाता था. लेकिन भारत के एक स्पिन गेंदबाज़ इस पूरी धारणा को बदल डाला. नाम था हरभजन सिंह. इन्होंने दुनिया को अपने खेल और अग्रेशन से ये बता दिया कि स्पिन गेंदबाज़ भी सिर्फ़ गेंदबाज़ी से ही नहीं, अपनी बोली से भी बल्लेबाज़ को चुप करा सकते हैं.

1932 से भारत ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलना शुरू किया था. लेकिन साल 2001 तक किसी भी गेंदबाज़ ने टेस्ट में हैट्रिक नहीं ली थी. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ 2001 में हुई सीरीज़ में हरभजन सिंह ने दूसरे टेस्ट के दौरान ये कारनामा कर दिखाया. वो देश पहले गेंदबाज़ बने, जिन्होंने टेस्ट मैच में हैट्रिक ली हो. सबसे ख़ास बात ये थी ये हैट्रिक तब आई, जब ऑस्ट्रेलिया जीत के रथ पर सावर हो कर लगातार 16 टेस्ट जीतने का रिकॉर्ड बना चुकी थी और उसकी नज़र 17वीं जीत पर थी.

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ऑस्ट्रेलिया टीम हमेशा से ही फ़ील्ड के अंदर और बाहर माइंड गेम खेलने के लिए विरोधी टीमों के खिलाड़ियों के साथ स्लेज़िग करती नज़र आती थी. भारतीय टीम 2007-08 के दौरान ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थी. जहां हरभजन को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों ने उन्हें स्लेज़ करना शुरू किया. हरभजन सिंह भी कहां चुप रहने वाले थे और उन्होंने भी बोलना शुरू किया. इसके बाद Andrew Symonds के साथ हुई कॉन्ट्रोवर्सी हम सब जानते ही हैं. आखिर ऑस्ट्रेलिया टीम ने एक सरदार को गुस्सा दिलाया था. नतीजा तो ये आना ही था.

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2008 में हुए IPL के दौरान हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ मारा था. बात थी कि श्रीसंत की टीम मैच जीत गई थी और वो इस खुशी में हरभजन सिंह के साथ कुछ मज़ाक कर बैठे. अब देखिए जो दूसरे देश में जा कर कुछ बर्दाश्त नहीं कर पाया वो अपने देश में जूनियर खिलाड़ी का मज़ाक कैसे बर्दाशत करता. खैर, इस वाकये के बाद हरभजन ने श्रीसंत से माफ़ी भी मांगी थी. बंदा दिल का अच्छा है!

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हरभजन सिंह जितने बेहतर गेंदबाज़ हैं, उतने ही अक्रामक बल्लेबाज़ भी. 2010 में पाकिस्तान के खिलाफ़ लगाया गया उनकी विनिंग छक्का कोई भी भारतीय क्रिकेट फ़ैन नहीं भूल सकता. इस मैच के दौरान उनका झगड़ा शोएब अख़्तर से भी हुआ था और जीतने के बाद हरभजन सिंह ने उनकी बोलती बंद कर दी थी.

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2010 में न्यूज़ीलैंड टीम भारत के दौरे पर थी. एक मैच के दौरान भारतीय टीम की हालत काफ़ी नाजुक हो गई थी. टीम 15 रन के स्कोर पर 5 विकेट खो चुकी थी. तब हरभजन सिंह ने लक्ष्मण के साथ मिल कर शानदार बल्लेबाज़ी की और इस मैच बचाने वाली इंनिंग में अपना पहला टेस्ट शतक भी जड़ा था.

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IPL में भी हरभजन सिंह का रुतबा काफ़ी बड़ा रहा है. उनकी गेंदबाज़ी से ज़्यादा यहां उनकी बल्लेबाज़ी ने सुर्खिंयां बटोरीं. पंजाब के खिलाफ़ 19 बॉल में 50 रन की उनकी पारी को IPL इतिहास की सबसे शानदार पारियों में से एक देखा जाता है.

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भारतीय क्रिकेट टीम में जितने भी सिंह आ जाए, ये सिंह हमेशा किंग रहेगा!