कैलेंडर की तारीख के हिसाब से देखें तो हम 21वीं सदी में जी रहे हैं. विज्ञान और तकनीक के युग में तेज़ी से प्रगति करने के बावजूद आज भी हम कई मायनों में पीछे चल रहे हैं. हमारे समाज में कुछ ऐसे नियम तय हैं जो विकसित राष्ट्र बनने की राह में बहुत बड़ी बाधा हैं. इन्हीं में से एक है स्त्रियों पर ज़रूरत से ज़्यादा पाबंदियां. कुछ लोग स्त्रियों को आज भी चारदीवारी में क़ैद कर के रखते हैं और उनकी आज़ादी छीन लेते हैं.

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हमारे समाज के कई समुदायों में स्त्रियों के लिए लंबा घूंघट करना अनिवार्य किया गया है ताकि किसी पर-पुरुष का साया तक उन पर न पड़े और इस हरकत को संस्कार नाम दे दिया गया है.

गांवों में पुरुषों की मौजूदगी को सम्मान देने के लिए भी बहुत सी औरतों को सिर ढकना अनिवार्य है. अगर स्त्री अपनी मर्ज़ी से घूंघट करे तो ये जायज़ है, पर ज़बरदस्ती उसे अपनी मौजूदगी छिपाने पर मजबूर करना सही नहीं है.

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ख़ाप पंचायतों को लेकर हम हमेशा नकारात्मक ख़बरें ही सुनते हैं. लेकिन पहली बार एक खाप पंचायत ने ऐसा निर्णय लिया जिसे सुनकर किसी को भी गर्व होगा.

मलिक गठवाला खाप, हरियाणा के सबसे बड़े खापों में से एक है. इस खाप ने सोनीपत में एक समारोह के दौरान घोषणा करते हुए कहा कि स्त्रियों को घूंघट में रखना बेवकूफ़ी है.

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मलिक गठवाला खाप के मुखिया, बलजीत मलिक ने कहा,

वक़्त आ गया है जब पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं को बदला जाए. औरतों को घूंघट में रखना बेवकूफ़ी है. इससे उन्हें देखने में परेशानी तो होती ही है सांस लेने में भी परेशानी होती है. खुशियां और शांति उसी घर में दस्तक देती हैं जहां बहुओं को बेटियों की तरह प्यार दिया जाता है.

इस समारोह में बिहार के राज्यपाल, सत्यपाल मलिक भी उपस्थित थे.

खाप शब्द सुनते ही दिमाग़ में नकारात्मक विचार घर करने लगते हैं. इन पंचायतों ने औरतों पर बेहिसाब पाबंदियां लगाई हैं. लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले कुछ सालों में स्त्रियों के उत्थान के लिए भी खापें काम कर रही हैं.

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मलिक गठवाला खाप ने 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' को पूर्ण समर्थन देते हुए उन लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का फ़ैसला लिया जो कन्या भ्रूण हत्या और बच्चियों की हत्या करते हैं. मलिक गोत्र के लोगों ने खाप के इस फ़ैसले को सहर्ष स्वीकार किया.

छोटे-छोटे बदलावों से ही तो हम एक बेहतर समाज बना सकेंगे. हम उम्मीद करते हैं कि खाप पंचायतें ऐसे ही बदलाव लाती रहेंगी.

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