हाल ही में एक BSF जवान ने अपनी ड्यूटी में मिलने वाले खाने के हालात का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था. वीडियो काफ़ी तेज़ी से वायरल भी हुआ. इस समस्या की गम्भीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री तक को इस पर बयान देना पड़ा था. इस BSF कॉन्सटेबल का नाम तेज बहादुर यादव है.

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लेकिन इस वीडियो के बाद एक ख़बर आई कि उनको सीमा से वापस बुला लिया गया है और तेज बहादुर जी को पल्मबर का काम दिया गया है. इसे एक सज़ा के तौर पर देखा गया, क्योंकि उन्होंने अपनी दिक्कतों को वीडियो के जरिए पब्लिक कर दिया.

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लेकिन अब एक और ख़बर न्यूज एजेंसी ANI की तरफ़ से आई है कि तेज बहादुर को गिरफ़्तार कर लिया गया है, जिसकी जानकारी ख़ुद उनकी पत्नी ने दी है.

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ANI से बात करते हुए तेज बदादुर की पत्नी ने बताया कि उनका रिटार्यमेंट होने वाला था, जिसके बाद वो 31 जनवरी को घर वापस आने वाले थे. लेकिन वो नहीं आए. एक दिन उनका फ़ोन आया कि उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है और उन्हे टॉर्चर किया जा रहा है. ये टॉर्चर शारीरिक और दिमागी दोनों तरह का है. उन्हें न तो किसी और से मिलने दिया जा रहा है और न ही उन्हें किसी से बात करने की अनुमति है.

तेज बहादुर ने ये फ़ोनकॉल भी किसी से मांग कर छिप कर किया था. जब इसका जवाब BSF के अधिकारियों से मांगा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है, हालांकि उनके खिलाफ़ अनुशासन तोड़ने का केस दर्ज है, लेकिन अभी उनके खिलाफ़ कोई भी एक्शन लेने का हुक्म नहीं आया है.

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तेज बदादुर की पत्नी अपने पति को लेकर काफ़ी चिंतित और डरी हुई हैं. उन्होंने बोला कि अपने पति के हालात को देख कर वो कभी भी अपने बेटे को फ़ौज में नहीं भेजना चाहेंगी.

इस तरह की ख़बरें लोगों के अंदर से फ़ौज की छवि को ख़राब करती हैं. सरकार की तरफ़ से अभी तक इस मामले पर कोई पुख्ता कार्यवाही नहीं की गई है. लोगों के सामने या तो सेना का पक्ष आ रहा है, या तो जवान का. एक निष्पक्ष जांच की ज़रूरत है, वर्ना देश के कई बच्चे फ़ौज में जाने से पहले कई बार सोचेंगे.

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